बिहार में नकली पनीर की बिक्री पर पटना हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार से मांगा जवाब

पटना। बिहार में कथित तौर पर अवैध तरीके से एनालॉग पनीर (कृत्रिम पनीर) के निर्माण और बिक्री को लेकर पटना हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। इस मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 11 जनवरी 2027 को होगी।

Nov 5, 2026 - 15:53
बिहार में नकली पनीर की बिक्री पर पटना हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार से मांगा जवाब

पटना। बिहार में कथित तौर पर अवैध तरीके से एनालॉग पनीर (कृत्रिम पनीर) के निर्माण और बिक्री को लेकर पटना हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। इस मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 11 जनवरी 2027 को होगी।

चीफ जस्टिस वी. कामेश्वर राव की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राजीव रंजन सिंह की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है। वहीं, जवाब मिलने के बाद याचिकाकर्ता को अपना पक्ष रखने के लिए चार सप्ताह की मोहलत दी गई है।

नकली पनीर से स्वास्थ्य पर खतरे का आरोप

जनहित याचिका में कहा गया है कि राज्य में एनालॉग पनीर की बिक्री से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। याचिकाकर्ता ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 (FSSAI Act) के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने की मांग की है।

याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि आम लोगों को एनालॉग पनीर और वास्तविक दूध से बने पनीर के बीच अंतर के बारे में जागरूक किया जाए, ताकि उपभोक्ता खाद्य पदार्थों की सही पहचान कर सकें।

खाद्य सुरक्षा एजेंसी की छापेमारी जारी

इस बीच, राज्य की खाद्य सुरक्षा एजेंसियां विभिन्न मिठाई दुकानों और रेस्टोरेंट में कथित नकली पनीर की बिक्री और भंडारण को लेकर छापेमारी कर रही हैं। कई जगहों पर खाद्य पदार्थों के नमूने लेने और संदिग्ध सामग्री की जांच की कार्रवाई भी की जा रही है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि इस मामले में राज्य के मुख्य सचिव और स्वास्थ्य सचिव को अभ्यावेदन दिया गया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के बाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।

अब इस मामले में राज्य सरकार के जवाब और कोर्ट की अगली सुनवाई पर नजर रहेगी। 11 जनवरी 2027 को होने वाली सुनवाई में इस जनहित याचिका पर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है।

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