झारखंड में अफीम सिंडिकेट पर पुलिस का बड़ा प्रहार, खेती से लेकर किंगपिन तक होंगे निशाने पर
रांची। झारखंड में अफीम की अवैध खेती और तस्करी के खिलाफ पुलिस अब निर्णायक कार्रवाई की तैयारी में है। इस बार निशाने पर सिर्फ खेतों में अफीम उगाने वाले किसान और छोटे तस्कर नहीं, बल्कि खेती के लिए पैसा लगाने वाले, अफीम खरीदने वाले और अंतरराज्यीय नेटवर्क संचालित करने वाले बड़े किंगपिन भी होंगे। पुलिस मुख्यालय ने खेत से लेकर अंतिम खरीदार तक पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त करने के लिए तीन स्तरीय रणनीति तैयार की है।
रांची। झारखंड में अफीम की अवैध खेती और तस्करी के खिलाफ पुलिस अब निर्णायक कार्रवाई की तैयारी में है। इस बार निशाने पर सिर्फ खेतों में अफीम उगाने वाले किसान और छोटे तस्कर नहीं, बल्कि खेती के लिए पैसा लगाने वाले, अफीम खरीदने वाले और अंतरराज्यीय नेटवर्क संचालित करने वाले बड़े किंगपिन भी होंगे। पुलिस मुख्यालय ने खेत से लेकर अंतिम खरीदार तक पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त करने के लिए तीन स्तरीय रणनीति तैयार की है।
खेती शुरू होने से पहले नेटवर्क पर शिकंजा
अब तक अफीम के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई मुख्य रूप से अवैध फसलों को नष्ट करने और स्थानीय स्तर पर आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित रही है। लेकिन इस बार रणनीति का दायरा बढ़ाया गया है। पुलिस का लक्ष्य खेती शुरू होने से पहले ही पूरे नेटवर्क की पहचान कर उसकी आर्थिक और आपराधिक गतिविधियों पर रोक लगाना है।
इसके लिए नवंबर से ही निगरानी और खुफिया तंत्र को सक्रिय किया जा रहा है। नवंबर, दिसंबर और जनवरी के दौरान विशेष अभियान चलाकर संदिग्ध इलाकों पर नजर रखी जाएगी।
चार जिलों पर विशेष फोकस
खूंटी, चतरा, लातेहार और पश्चिमी सिंहभूम जिले पुलिस के विशेष रडार पर हैं। इन जिलों के उन गांवों और जमीनों को चिह्नित किया जा रहा है, जहां पहले बड़े पैमाने पर अफीम की अवैध खेती होती रही है।
पुलिस और वन विभाग संयुक्त रूप से अभियान चलाएंगे। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सैटेलाइट, ड्रोन और स्थानीय सूचना तंत्र की मदद ली जाएगी। उद्देश्य यह है कि अफीम की खेती शुरू होने से पहले ही संभावित ठिकानों की पहचान कर कार्रवाई की जा सके।
तीन स्तरों पर होगी कार्रवाई
पहला स्तर: खेती कराने वालों और फंडिंग करने वालों पर कार्रवाई
पुलिस उन लोगों की पहचान करेगी, जो अफीम की खेती के लिए जमीन उपलब्ध कराते हैं, खेती करवाते हैं या इसके लिए आर्थिक मदद देते हैं। ऐसे लोगों की भूमिका की जांच कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
दूसरा स्तर: सप्लाई और परिवहन नेटवर्क पर शिकंजा
खेतों से निकलने वाली अफीम की खरीद-बिक्री, परिवहन और सप्लाई चेन की जांच की जाएगी। बिहार और उत्तर प्रदेश के रास्तों से होने वाली तस्करी की कड़ियों को जोड़ने के लिए संबंधित राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय किया जाएगा।
तीसरा स्तर: अंतरराज्यीय किंगपिन और बड़े खरीदार निशाने पर
पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में सक्रिय बड़े खरीदारों और तस्करी नेटवर्क के संचालकों तक पहुंचने की तैयारी है। पुराने एनडीपीएस मामलों में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ, मोबाइल संपर्कों और वित्तीय लेनदेन की जांच के जरिए पूरे सिंडिकेट का पता लगाने की कोशिश होगी।
पुलिस मुख्यालय ने तैयार की व्यापक रणनीति
बाइट: नागेंद्र सिंह, प्रवक्ता, झारखंड पुलिस
पुलिस की इस रणनीति का मकसद अफीम की खेती और तस्करी के पूरे आर्थिक ढांचे को तोड़ना है। अब कार्रवाई केवल खेतों में लगी फसल नष्ट करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अवैध कारोबार में निवेश करने वालों, सप्लाई नेटवर्क और बड़े खरीदारों तक पहुंचने पर जोर रहेगा।
झारखंड पुलिस की इस नई रणनीति से अफीम के अवैध कारोबार से जुड़े सिंडिकेट पर दबाव बढ़ने की उम्मीद है। अब देखना होगा कि निगरानी, अंतरराज्यीय समन्वय और वित्तीय जांच के जरिए पुलिस इस नेटवर्क पर कितना प्रभावी प्रहार कर पाती है।
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