झारखंड में 'खेत बचाओ अभियान' की शुरुआत, किसानों को परती जमीन के इस्तेमाल और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने पर जोर

रांची: झारखंड में किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और कृषि उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने खेत बचाओ अभियान पर जोर दिया है। इसी कड़ी में गुरुवार को रांची के हेसाग स्थित पशुपालन भवन में राज्य स्तरीय खेत बचाओ अभियान सह रबी कर्मशाला-2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के सचिव अबु बकर सिद्दीकी पी सहित कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक और विभिन्न जिलों से आए पदाधिकारी शामिल हुए।

Nov 5, 2026 - 17:52
झारखंड में 'खेत बचाओ अभियान' की शुरुआत, किसानों को परती जमीन के इस्तेमाल और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने पर जोर

रबी कर्मशाला-2026 में कृषि सचिव अबु बकर सिद्दीकी पी ने अधिकारियों को दिए निर्देश, कहा- किसानों तक सरकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ पहुंचाना प्राथमिकता

रांची: झारखंड में किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और कृषि उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने खेत बचाओ अभियान पर जोर दिया है। इसी कड़ी में गुरुवार को रांची के हेसाग स्थित पशुपालन भवन में राज्य स्तरीय खेत बचाओ अभियान सह रबी कर्मशाला-2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के सचिव अबु बकर सिद्दीकी पी सहित कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक और विभिन्न जिलों से आए पदाधिकारी शामिल हुए।

कर्मशाला को संबोधित करते हुए कृषि सचिव ने अधिकारियों से कहा कि किसानों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करें। किसानों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करें और उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर करें।

किसानों को सरकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ दिलाने पर जोर

कृषि सचिव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में कई योजनाएं चला रही है और विभिन्न कृषि कार्यों के लिए सब्सिडी भी उपलब्ध करा रही है। अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि इन योजनाओं की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचे और अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें।

उन्होंने कहा कि अधिकारी केवल कार्यालयों तक सीमित न रहें, बल्कि गांवों और खेतों तक पहुंचकर किसानों की वास्तविक समस्याओं को समझें। किसानों की खुशहाली और आर्थिक सशक्तिकरण सरकार की प्राथमिकता है।

परती जमीन का होगा बेहतर इस्तेमाल, मिट्टी की उर्वरता पर फोकस

इस वर्ष की रबी कर्मशाला में दो प्रमुख विषयों खेत बचाओ अभियान और रबी फसल उत्पादन पर विशेष चर्चा की गई। कृषि सचिव ने खेतों की उर्वरता और स्वास्थ्य बनाए रखने, परती जमीन का बेहतर उपयोग करने तथा कृषि उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया।

उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के सीमित और सुरक्षित इस्तेमाल की आवश्यकता बताई। साथ ही फसल उत्पादकता, फसल सघनता, सिंचाई व्यवस्था और कृषि उत्पादों के बाजार से जुड़ाव को मजबूत करने की बात कही।

तालाब और नहरों के आंकड़े अपडेट करने का निर्देश

कृषि सचिव ने सभी जिलों में सिंचाई संसाधनों का अद्यतन डेटा तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जिलों में उपलब्ध तालाबों, नहरों और अन्य सिंचाई सुविधाओं का संशोधित आंकड़ा तैयार किया जाए। इन संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

उन्होंने कृषि उत्पादों के बेहतर विपणन के लिए बाजार संपर्क मजबूत करने और फसल उत्पादकता के साथ फसल सघनता बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया।

कृषि निदेशक ने रासायनिक खाद के संतुलित इस्तेमाल की दी सलाह

कर्मशाला में कृषि निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज ने परती भूमि के अधिकतम उपयोग और उसमें फसल आच्छादन का क्षेत्र बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे कृषि उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि हो सकती है।

उन्होंने मिट्टी के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने और टिकाऊ कृषि विकास के लिए रासायनिक उर्वरकों के संतुलित एवं विवेकपूर्ण इस्तेमाल की सलाह दी। साथ ही अधिकारियों और कर्मचारियों से तकनीकी सत्रों में सक्रिय भागीदारी करने की अपील की।

किसानों की आय बढ़ाने के लिए भूमि संरक्षण जरूरी : कुलपति

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति सीएस दुबे ने कहा कि खेत बचाओ अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को भूमि के स्वास्थ्य और उसकी उर्वरा शक्ति बनाए रखने के प्रति जागरूक करना है। भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहेगी, तभी किसान बेहतर उत्पादन हासिल कर अपनी आमदनी बढ़ा सकेंगे।

उन्होंने भूमि संरक्षण के विभिन्न उपायों की जानकारी देते हुए कहा कि कृषि उत्पादकता बढ़ाने के साथ मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखना भी जरूरी है।

कार्यक्रम में मृदा निदेशक विकास कुमार, निदेशक समिति रमाशंकर प्रसाद, गव्य निदेशक संजीव कुमार सहित विभिन्न कृषि वैज्ञानिकों ने भी अपने विचार रखे। इसके अलावा कृषि विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारी, जिला कृषि पदाधिकारी और कृषि एवं संबद्ध विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

कुल मिलाकर, इस कर्मशाला के जरिए राज्य में खेती को अधिक उत्पादक और टिकाऊ बनाने, परती जमीन के उपयोग, सिंचाई संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की रणनीति पर चर्चा की गई।

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