मरांग बुरू धोरोमगाड़ महासम्मेलन में शामिल हुए CM हेमंत सोरेन, बोले- आदिवासी समाज को संगठित होकर अपनी परंपरा बचानी होगी

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन गुरुवार को गिरिडीह जिले के पीरटांड़ स्थित मधुबन थाना मैदान में आयोजित 'मरांग बुरू धोरोमगाड़ महासम्मेलन' में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने संताली भाषा में आदिवासी समाज को संबोधित किया और समाज की एकता, संस्कृति, परंपरा और सर्वांगीण विकास पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी समाज को विशिष्ट सामाजिक अधिकार प्राप्त हैं और भारतीय संविधान में भी इन अधिकारों को मान्यता दी गई है।

Nov 5, 2026 - 18:31
मरांग बुरू धोरोमगाड़ महासम्मेलन में शामिल हुए CM हेमंत सोरेन, बोले- आदिवासी समाज को संगठित होकर अपनी परंपरा बचानी होगी

गिरिडीह:-  झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन गुरुवार को गिरिडीह जिले के पीरटांड़ स्थित मधुबन थाना मैदान में आयोजित 'मरांग बुरू धोरोमगाड़ महासम्मेलन' में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने संताली भाषा में आदिवासी समाज को संबोधित किया और समाज की एकता, संस्कृति, परंपरा और सर्वांगीण विकास पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी समाज को विशिष्ट सामाजिक अधिकार प्राप्त हैं और भारतीय संविधान में भी इन अधिकारों को मान्यता दी गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मरांग बुरू धोरोमगाड़ का संरक्षण और देखभाल हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है। समाज को संगठित, सशक्त और प्रगतिशील बनाने के लिए सामूहिक सहभागिता और आपसी सहयोग जरूरी है। उन्होंने महासम्मेलन में जुटे लोगों को शुभकामनाएं देते हुए हरसंभव सहयोग का आश्वासन भी दिया।

आदिवासी समाज देश का सबसे पुराना समाज

हेमंत सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज देश का सबसे पुराना समाज है। समाज की जड़ें मजबूत हैं, लेकिन समय के साथ इसकी शाखाएं अलग-अलग हो गई हैं। आज समाज के कुछ लोग खुद को हिंदू मानते हैं, तो कुछ सरना परंपरा से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को अपनी सांस्कृतिक पहचान, भाषा और परंपराओं को समझने की जरूरत है।

मुख्यमंत्री ने जंगल को आदिवासी समाज के जीवन और आजीविका का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि पूर्वजों का जीवन जंगल, कृषि और पशुपालन से जुड़ा रहा है। जंगल उनके लिए भगवान के समान है। हालांकि, वर्तमान पीढ़ी धीरे-धीरे पारंपरिक आजीविका से दूर होती जा रही है।

युवाओं से परंपरा और रीति-रिवाजों को समझने की अपील

मुख्यमंत्री ने युवाओं से अपनी परंपरा, रीति-रिवाज और समाज की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझने का आह्वान किया। उन्होंने अपने पिता दिशोम गुरु शिबू सोरेन और माता रूपी सोरेन का जिक्र करते हुए कहा कि उनका पारंपरिक विधि-विधान से द्वादशकर्म संपन्न किया गया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को भी अपने समाज की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ना चाहिए।

उन्होंने कहा कि दुनिया विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन आदिवासी समाज को शिक्षा, आर्थिक और सामाजिक स्तर पर अभी काफी आगे बढ़ना है। इसके लिए सभी लोगों को एकजुट होकर प्रयास करना होगा।

25 साल बाद भी विकास की चुनौती

हेमंत सोरेन ने झारखंड आंदोलन में दिशोम गुरु शिबू सोरेन के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से राज्य को एक बड़ी ताकत मिली। झारखंड अलग राज्य बने 25 साल से अधिक समय हो चुका है, लेकिन अभी भी अपेक्षित विकास की दिशा में काफी काम किया जाना बाकी है। उन्होंने कहा कि राज्य और समाज को विकास के रास्ते पर आगे ले जाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।

मुख्यमंत्री ने स्थानीय विधायक और मंत्री रहे सुदिव्य कुमार सोनू को भी याद किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता ने उन्हें विधायक बनाया था और मंत्री पद देकर क्षेत्र का मान बढ़ाने का प्रयास किया गया था, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था।

नशाखोरी आदिवासी समाज की बड़ी चुनौती

मुख्यमंत्री ने आदिवासी समाज में बढ़ती नशाखोरी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नशे की लत समाज को कमजोर कर रही है। इससे बाहर निकलने के लिए सरकार जागरूकता अभियान चला रही है। 'नशामुक्त जीवन हो हमारा' अभियान के जरिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

उन्होंने फूलो-झानो आशीर्वाद योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इस योजना का उद्देश्य हड़िया-दारू बेचने वाली महिलाओं को सम्मानजनक आजीविका और स्वरोजगार से जोड़ना है। मुख्यमंत्री ने लोगों से नशामुक्त समाज के निर्माण में सहयोग करने और नशाखोरी छोड़ने की अपील की।

महासम्मेलन में कई जनप्रतिनिधि और सामाजिक प्रतिनिधि रहे मौजूद

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में कई करीबी लोगों को खोने से उन्हें व्यक्तिगत रूप से काफी दुख पहुंचा है। उन्होंने दिवंगत लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही महासम्मेलन के आयोजकों की ओर से सौंपे गए ज्ञापन पर न्यायसंगत कार्रवाई और समाज को हरसंभव मदद का भरोसा दिया।

कार्यक्रम में विधायक सोमेश सोरेन, विधायक कल्पना सोरेन, मरांग बुरू बचाओ संघर्ष मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष फागू बेसरा, महासचिव हीरालाल मांझी, जिला अध्यक्ष महावीर मुर्मू और सचिव विष्णु किस्कू सहित कई लोग मौजूद रहे। झारखंड के विभिन्न जिलों के अलावा असम, ओडिशा, बिहार, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल से भी आदिवासी समाज के प्रतिनिधि महासम्मेलन में शामिल हुए।

कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने पर मुख्यमंत्री को सीआरपीएफ कैंप परिसर स्थित हेलीपैड पर स्थानीय प्रशासन की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस दौरान आईजी, डीआईजी, उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक ने उनका स्वागत किया।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0