वाराणसी में मारा गया TSPC सुप्रीमो ब्रजेश गंझू, 30 लाख का था इनाम; झारखंड के पूर्व DG बीबी प्रधान ने बताया बड़ी कार्रवाई

रांची/वाराणसी: झारखंड के प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन TSPC के सुप्रीमो ब्रजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता की उत्तर प्रदेश के वाराणसी में यूपी ATS के साथ हुई मुठभेड़ में मौत हो गई। ब्रजेश गंझू लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की गिरफ्त से बाहर था और अलग-अलग नामों से पहचान छिपाकर रह रहा था। पुलिस के मुताबिक, वाराणसी के रामनगर इलाके में उसे रोकने की कोशिश की गई, जिसके बाद फायरिंग हुई और जवाबी कार्रवाई में वह घायल हो गया। अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

Sep 21, 2026 - 10:49
वाराणसी में मारा गया TSPC सुप्रीमो ब्रजेश गंझू, 30 लाख का था इनाम; झारखंड के पूर्व DG बीबी प्रधान ने बताया बड़ी कार्रवाई

रांची/वाराणसी:- झारखंड के प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन TSPC के सुप्रीमो ब्रजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता की उत्तर प्रदेश के वाराणसी में यूपी ATS के साथ हुई मुठभेड़ में मौत हो गई। ब्रजेश गंझू लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की गिरफ्त से बाहर था और अलग-अलग नामों से पहचान छिपाकर रह रहा था। पुलिस के मुताबिक, वाराणसी के रामनगर इलाके में उसे रोकने की कोशिश की गई, जिसके बाद फायरिंग हुई और जवाबी कार्रवाई में वह घायल हो गया। अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 

ब्रजेश गंझू पर झारखंड सरकार ने 25 लाख रुपये और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 5 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। यानी उस पर कुल 30 लाख रुपये का इनाम था। पुलिस रिकॉर्ड में वह ब्रजेश गंझू के अलावा गोपाल सिंह भोक्ता, दुलारचंद गंझू, रंजन, फूलचंद और सरदार जैसे नामों से भी जाना जाता था। 

चतरा जिले में ब्रजेश गंझू के खिलाफ हत्या, अपहरण, रंगदारी, आगजनी, अवैध हथियार, विस्फोटक और उग्रवादी गतिविधियों से जुड़े बड़ी संख्या में मामले दर्ज थे। अलग-अलग पुलिस और मीडिया रिपोर्टों में उसके खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या 39 से लेकर 50 से अधिक तक बताई गई है। 

झारखंड कैडर के पूर्व IPS और पूर्व DG बीबी प्रधान ने इस कार्रवाई को झारखंड के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ब्रजेश गंझू चतरा और आसपास के इलाकों में लंबे समय से सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था। उनके मुताबिक, ऐसे उग्रवादी नेटवर्क के कमजोर होने से राज्य में विकास और निवेश का माहौल मजबूत होने की उम्मीद रहती है।

बीबी प्रधान ने झारखंड में नक्सल विरोधी अभियानों के शुरुआती दौर को याद करते हुए कहा कि राज्य गठन के समय सुरक्षा बलों को नक्सली गतिविधियों से निपटने के साथ-साथ संसाधनों और मैनपावर की कमी से भी जूझना पड़ता था। समय के साथ पुलिस और सुरक्षा बलों के लगातार अभियानों का असर दिखा और राज्य में उग्रवादी गतिविधियों में कमी आई।

ब्रजेश गंझू की मौत के बाद TSPC के खिलाफ चल रहे अभियान में सुरक्षा एजेंसियों को एक और बड़ी सफलता मिली है। वाराणसी मुठभेड़ के बाद उसके नेटवर्क और संभावित सहयोगियों को लेकर भी जांच जारी है।

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