झारखंड में HPV वैक्सीनेशन पर अभी फैसला नहीं, सर्वाइकल कैंसर के मामलों का होगा राज्यव्यापी सर्वे

रांची। झारखंड की किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित रखने के लिए प्रस्तावित HPV टीकाकरण पर राज्य सरकार फिलहाल गहन अध्ययन के बाद ही निर्णय लेगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वास्थ्य विभाग को राज्यव्यापी सर्वेक्षण कराने, विशेषज्ञ समिति गठित करने और देश-विदेश के चिकित्सा विशेषज्ञों से परामर्श लेने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी वैज्ञानिक, चिकित्सकीय और सुरक्षा संबंधी पहलुओं का मूल्यांकन करने के बाद ही टीकाकरण को लेकर आगे कदम उठाया जाएगा।

Nov 5, 2026 - 09:41
झारखंड में HPV वैक्सीनेशन पर अभी फैसला नहीं, सर्वाइकल कैंसर के मामलों का होगा राज्यव्यापी सर्वे

रांची। झारखंड की किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित रखने के लिए प्रस्तावित HPV टीकाकरण पर राज्य सरकार फिलहाल गहन अध्ययन के बाद ही निर्णय लेगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वास्थ्य विभाग को राज्यव्यापी सर्वेक्षण कराने, विशेषज्ञ समिति गठित करने और देश-विदेश के चिकित्सा विशेषज्ञों से परामर्श लेने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी वैज्ञानिक, चिकित्सकीय और सुरक्षा संबंधी पहलुओं का मूल्यांकन करने के बाद ही टीकाकरण को लेकर आगे कदम उठाया जाएगा।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बुधवार को झारखंड मंत्रालय में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने, मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार, स्वास्थ्य बीमा योजनाओं और सरकारी अस्पतालों की सुविधाओं को बेहतर बनाने पर चर्चा हुई।

सर्वाइकल कैंसर के मामलों का जुटाया जाएगा विस्तृत आंकड़ा

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि झारखंड में सर्वाइकल कैंसर के मामलों का अनुमानित आंकड़ा प्रति एक लाख आबादी पर 13 है। इस गंभीर बीमारी की रोकथाम के लिए प्रस्तावित HPV टीकाकरण के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि पूरे राज्य में सर्वेक्षण कराकर सर्वाइकल कैंसर से प्रभावित लोगों की वास्तविक संख्या, आयु वर्ग, बीमारी के विभिन्न चरणों और सक्रिय मामलों का विस्तृत आंकड़ा जुटाया जाए। इसके आधार पर समग्र रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

उन्होंने विशेषज्ञ समिति गठित करने तथा देश-विदेश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों के निदेशकों, कैंसर विशेषज्ञों और संबंधित विषय के विशेषज्ञों से परामर्श लेने को कहा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि टीकाकरण के क्रियान्वयन पर निर्णय सभी तथ्यों और विशेषज्ञों की राय के आधार पर ही लिया जाएगा।

कैंसर की समय पर पहचान के लिए जांच व्यवस्था होगी मजबूत

मुख्यमंत्री ने सर्वाइकल कैंसर की समय पर पहचान और रोकथाम के लिए नियमित स्क्रीनिंग व्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में पैप स्मीयर टेस्ट तथा HPV DNA टेस्ट जैसी जांच सुविधाओं की उपलब्धता और पहुंच बेहतर बनाने का निर्देश दिया।

उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने को कहा, ताकि लोगों तक बीमारी और उसके बचाव से जुड़ी प्रमाणिक जानकारी पहुंचे तथा किसी तरह की अफवाह या भ्रांति की स्थिति उत्पन्न न हो।

रिम्स में 319 मेडिकल शिक्षकों के पदों का होगा पुनर्गठन

बैठक में रांची स्थित राजेन्द्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में चिकित्सा शिक्षा और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर भी चर्चा हुई। रिम्स में मेडिकल शिक्षकों के कुल 319 स्वीकृत पदों के पुनर्गठन का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया।

प्रस्ताव के तहत 7 सुपर स्पेशियलिटी और 3 ब्रॉड स्पेशियलिटी विभागों के सृजन की योजना है। इसके अलावा चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरतों को देखते हुए 16 नए पदों के सृजन का प्रस्ताव भी रखा गया।

प्रस्तावित पुनर्गठन के तहत:

  • प्राध्यापक के पद 44 से घटाकर 42 किए जाएंगे।

  • अपर प्राध्यापक के पद 9 से घटाकर 8 होंगे।

  • सह-प्राध्यापक के पद 95 से बढ़ाकर 96 किए जाएंगे।

  • सहायक प्राध्यापक के पद 170 से बढ़ाकर 172 होंगे।

  • सहायक प्राध्यापक-सह-सांख्यिकी का 1 पद यथावत रहेगा।

पुनर्गठन के बाद मेडिकल शिक्षकों के कुल स्वीकृत पदों की संख्या 319 ही रहेगी। इसका उद्देश्य विशेषज्ञ चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देना और मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना है।

मुख्यमंत्री ने रिम्स की ओपीडी व्यवस्था, मेडिकल सीटों, छात्रावासों और मरीजों को मिल रही चिकित्सा सुविधाओं की समीक्षा करते हुए संस्थान की समग्र व्यवस्था बेहतर बनाने का निर्देश दिया।

हजारीबाग, दुमका और पलामू मेडिकल कॉलेजों की भी समीक्षा

बैठक में हजारीबाग, दुमका और पलामू मेडिकल कॉलेजों की शैक्षणिक एवं चिकित्सकीय व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। इन संस्थानों में आधारभूत संरचना, मेडिकल शिक्षकों की उपलब्धता और चिकित्सा सुविधाओं को बेहतर बनाने पर चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में चिकित्सा शिक्षा का विस्तार करने के साथ आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।

अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत 10 लाख रुपये तक का लाभ

बैठक में मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को 10 लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा आयुष्मान भारत योजना के साथ इसके समन्वय की जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचे और इलाज के दौरान जरूरतमंद लोगों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो।

सरकारी अस्पतालों में एम्बुलेंस सेवाएं होंगी बेहतर

मुख्यमंत्री ने सरकारी अस्पतालों में एम्बुलेंस सेवाओं की स्थिति की समीक्षा करते हुए आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मरीजों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए आधारभूत संरचना, विशेषज्ञ चिकित्सकों, चिकित्सा शिक्षा और आधुनिक सुविधाओं के विस्तार की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएं।

बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह, विशेष सचिव नेहा अरोड़ा, स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के निदेशक और भवन निर्माण विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

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