बिहार MLC सदस्यता विवाद: निर्दलीय सदस्यों के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेगा जन सुराज, सभापति को सौंपेगा याचिका
पटना: बिहार में दो निर्दलीय विधान परिषद सदस्यों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। जन सुराज ने इस मामले को संविधान और जनादेश से जुड़ा मुद्दा बताते हुए दोनों एमएलसी की सदस्यता रद्द करने की मांग की है। पार्टी ने विधान परिषद के सभापति के समक्ष याचिका सौंपने और जरूरत पड़ने पर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की बात कही है।
पटना: बिहार में दो निर्दलीय विधान परिषद सदस्यों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। जन सुराज ने इस मामले को संविधान और जनादेश से जुड़ा मुद्दा बताते हुए दोनों एमएलसी की सदस्यता रद्द करने की मांग की है। पार्टी ने विधान परिषद के सभापति के समक्ष याचिका सौंपने और जरूरत पड़ने पर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की बात कही है।
जन सुराज के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरभ ने 1 नवंबर को पटना में आयोजित प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि भाजपा धनबल, सत्ता बल और प्रभाव के जरिए जनादेश को प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षक-स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव परिणाम आने के कुछ ही दिनों बाद निर्दलीय प्रत्याशियों का भाजपा में शामिल होना लोकतांत्रिक व्यवस्था और मतदाताओं के जनादेश पर सवाल खड़ा करता है।
चुनाव परिणाम के बाद भाजपा में शामिल हुए दो निर्दलीय एमएलसी
कुमार सौरभ के मुताबिक, बिहार में 27 अक्टूबर को चार शिक्षक और चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के एमएलसी चुनाव के परिणाम घोषित हुए थे। परिणामों में भाजपा को दो, निर्दलीय प्रत्याशियों को दो, राजद को दो, जदयू को एक और जन सुराज को एक सीट मिली थी।
उन्होंने कहा कि सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विजयी राहुल राज और तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विजयी बंशीधर बृजवासी ने चुनाव परिणाम आने के कुछ ही दिनों बाद भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली।
जन सुराज ने इसे मतदाताओं के जनादेश के साथ विश्वासघात बताते हुए कहा कि चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों को समर्थन देने वाले शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए।
निर्दलीय एमएलसी के दल में शामिल होने पर सदस्यता का सवाल
जन सुराज के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरभ ने संविधान के प्रावधानों का हवाला देते हुए दावा किया कि निर्दलीय निर्वाचित सदस्य यदि चुनाव के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होता है, तो उसकी सदस्यता समाप्त हो सकती है।
उन्होंने संविधान की दसवीं अनुसूची और संबंधित संवैधानिक प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मामले में विधान परिषद के सभापति के समक्ष याचिका दाखिल की जाएगी। पार्टी का कहना है कि दोनों सदस्यों के भाजपा में शामिल होने के मामले की जांच कर उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की जाएगी।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के सोशल मीडिया पोस्ट पर भी उठाए सवाल
प्रेस वार्ता के दौरान कुमार सौरभ ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी के सोशल मीडिया पोस्ट का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के सत्यापित फेसबुक अकाउंट पर दोनों एमएलसी के पार्टी में शामिल होने की जानकारी साझा की गई थी, जिसे बाद में संपादित किया गया।
कुमार सौरभ ने इस मामले में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से स्पष्टीकरण देने और शिक्षक-स्नातक मतदाताओं से माफी मांगने की मांग की। उन्होंने प्रेस वार्ता में सदस्यता से संबंधित तस्वीरों और वीडियो का भी हवाला दिया।
सभापति को याचिका, जरूरत पड़ने पर हाईकोर्ट जाएगा जन सुराज
जन सुराज के लीगल सेल नेता कुमार अमित ने कहा कि पार्टी विधान परिषद के सभापति को याचिका सौंपकर पूरे मामले की जांच कराने और संबंधित एमएलसी की सदस्यता रद्द करने की मांग करेगी।
उन्होंने कहा कि यदि संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप निर्णय नहीं लिया जाता है, तो जन सुराज उच्च न्यायालय का रुख करेगा। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि इस मामले में कानूनी लड़ाई के लिए संविधान में प्रावधान मौजूद हैं।
जन सुराज ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे को केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि संवैधानिक और कानूनी स्तर पर आगे बढ़ाएगा।
प्रेस वार्ता में ये नेता रहे मौजूद
पटना में आयोजित प्रेस वार्ता में जन सुराज के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरभ, लीगल सेल से कुमार अमित और मुकेश चौधरी तथा पार्टी के प्रधान महासचिव सुभाष कुशवाहा मौजूद रहे।
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