NDA में आरक्षण पर रार, जीतन राम मांझी के बेटे की 'कोटे में कोटा' की मांग पर चिराग पासवान का पलटवार

Aug 29, 2026 - 16:39
Aug 29, 2026 - 16:40
NDA में आरक्षण पर रार, जीतन राम मांझी के बेटे की 'कोटे में कोटा' की मांग पर चिराग पासवान का पलटवार

PATNA : बिहार की राजनीति में आरक्षण का मुद्दा गरमाता जा रहा है। NDA के अंदर दो सहयोगी दलों के बीच इस मुद्दे को लेकर घमासान मचा है। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के बीच आरक्षण को लेकर मतभेद खुलकर सामने आए हैं।

केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने जीतन राम मांझी और उनके बेटे मंत्री संतोष कुमार सुमन के आरक्षण को लेकर दिए गए बयानों पर पलटवार किया है। चिराग पासवान ने कहा कि अगर जीतन राम मांझी आरक्षण में क्रीमी लेयर का कॉन्सेप्ट लाना चाहते हैं तो पहले अपने पद से इस्तीफा दें। उन्होंने कहा कि आरक्षण को आर्थिक आधार से जोड़ने की कोशिश संविधान की मूल भावना से अलग होगी।

दरअसल, जीतन राम मांझी और उनके बेटे संतोष कुमार सुमन ने कहा था कि आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा होनी चाहिए और इसका लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंचना चाहिए।

‘क्रीमी लेयर लाना है तो पहले इस्तीफा दें’

चिराग पासवान ने जीतन राम मांझी के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर वह आरक्षण में क्रीमी लेयर का कॉन्सेप्ट लागू करने की बात करते हैं तो उन्हें पहले अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। उनके बेटे संतोष कुमार सुमन बिहार सरकार में मंत्री हैं और वह भी इस विचार का समर्थन करते हैं तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।

‘क्रीमी लेयर की बात है तो सदन में चर्चा हो’

चिराग पासवान ने कहा कि यदि संविधान में बदलाव की जरूरत महसूस होती है तो सभी सांसदों को लोकसभा के पटल पर आकर इस मुद्दे पर चर्चा करनी चाहिए। आरक्षण के मुद्दे को सिर्फ आर्थिक स्थिति से जोड़कर नहीं देखा जा सकता है।

'आर्थिक आधार पर नहीं, सामाजिक भेदभाव के कारण मिला आरक्षण'

चिराग पासवान ने आरक्षण की मूल अवधारणा को लेकर भी अपनी बात स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि आरक्षण की व्यवस्था आर्थिक अंतर को खत्म करने के लिए नहीं बनी थी। देश में लंबे समय तक जाति और सामाजिक आधार पर भेदभाव हुआ। इसी सामाजिक असमानता और वंचित समुदायों को बराबरी का अवसर देने के लिए आरक्षण की व्यवस्था लागू की गई। इसलिए आरक्षण का आधार आर्थिक नहीं है।

‘आरक्षण के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं नेता’

चिराग पासवान ने कहा कि आज हर कोई आरक्षण के मामले में अपनी-अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने में लगा है। आरक्षण जैसे संवेदनशील विषय को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल करने के बजाय गंभीरता से समझने की जरूरत है। इस मुद्दे पर कोई भी फैसला लेने से पहले इसके सामाजिक प्रभाव पर विचार किया जाना चाहिए।

राहुल गांधी पर भी चिराग का बड़ा हमला

चिराग पासवान ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी आरक्षण और सामाजिक भेदभाव के मुद्दे पर घेरा। उन्होंने कहा कि अगर आज भी समाज में भेदभाव मौजूद है तो इसके लिए सबसे लंबे समय तक देश में शासन करने वाली कांग्रेस ही जिम्मेदार है।

चिराग ने कहा कि राहुल गांधी आज समाज में मौजूद भेदभाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें अपने शासन के लंबे इतिहास पर भी जवाब देना चाहिए।

मांझी ने की थी आरक्षण की समीक्षा और कोटा की मांग

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा था, आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा होनी चाहिए। इसके बाद जरूरतमंद लोगों तक इस आरक्षण का लाभ पहुंचना चाहिए। उन्होंने पंजाब और हरियाणा की तर्ज पर कोटे के भीतर कोटा लागू करने की मांग भी की।

वहीं, बिहार सरकार के मंत्री संतोष सुमन ने SC-ST आरक्षण में उप-वर्गीकरण के फैसले का समर्थन किया था। उन्होंने यह भी कहा था कि आरक्षण की समीक्षा और SC-ST आरक्षण में उप-वर्गीकरण आज की जरूरत है। उन्होंने कहा था कि आजादी के 80 सालों के बाद भी समाज के सबसे वंचित समुदायों को आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है।

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