सरहुल के मौके पर आयोजित समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय

सरहुल के मौके पर आयोजित समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय

रांची। प्रकृति पर्व सरहुल के अवसर पर सोमवार को केंद्रीय सरना समिति और युवा सरना समिति द्वारा सिरमटोली में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय शामिल हुए। श्री सोरेन और श्री सहाय ने झारखंडवासियों को सरहुल पर्व की शुभकामनाएं दी। मौके पर मुख्यमंत्री श्री सोरेन ने कहा कि आदिवासी -सरना धर्मावलंबियों का यह सबसे बड़ा त्यौहार है। इस अवसर पर मुख्य रूप से धरती मां एवं सूरज का बंधन बांधा जाता है। यह पर्व प्रकृति के साथ जिंदगी जीने का संदेश भी देता है।
वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुबोधकांत सहाय ने कहा कि सरहुल सिर्फ एक पर्व का नाम नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का पर्व है। उन्होंने कहा कि वैश्विक महामारी कोरोना और ग्लोबल वार्मिंग के संकट से जूझ रहे मानव समुदाय को प्रकृति का अंधाधुंध दोहन बंद करने और सीमित संसाधनों में जिंदगी जीने के लिए प्रयत्नशील रहना होगा। जब हमारी धरती और सभ्यता संरक्षित रहेगी, तभी हमारा अस्तित्व बचा रहेगा। उन्होंने कहा कि जितना हम प्रकृति के करीब रहेंगे, उतना ही हमारा जीवन भी हरा-भरा रहेगा। सरहुल पर्व यही संदेश भी देता है।
केंद्रीय सरना समिति और युवा सरना समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पाहन ने विधिवत पूजा-अर्चना की। मौके पर पारंपरिक वेशभूषा में युवक-युवतियों ने नृत्य-संगीत कार्यक्रम प्रस्तुत कर स्थानीय सभ्यता और संस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया।