दिल्ली में जुटेगी दुनिया की आधी आबादी: 10 साल बाद एक मंच पर दिखेंगे मोदी-पुतिन-जिनपिंग
दिल्ली में 12-13 सितंबर को BRICS समिट है। 10 साल बाद मोदी-पुतिन-जिनपिंग एक मंच पर होंगे। BRICS अब PPP में G-7 से बड़ी इकोनॉमी बन गया है।
नई दिल्ली:- राजधानी दिल्ली आज से दुनिया की कूटनीति का केंद्र बन गई है। भारत मंडपम में 12-13 सितंबर को 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन शुरू हो रहा है। इस बार भारत चौथी बार इसकी अध्यक्षता कर रहा है।
*इस बार समिट क्यों है सबसे खास?*
इस समिट की सबसे बड़ी चर्चा है तीन बड़े नेताओं की मुलाकात। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक ही मंच पर आएंगे।
- *जिनपिंग का दौरा:* शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत आ रहे हैं। इससे पहले 2019 में वे तमिलनाडु के मामल्लापुरम में पीएम मोदी से मिले थे। 2020 में गलवान में हुई झड़प के बाद ये पहली बड़ी आमने-सामने की बैठक होगी। सूत्रों के मुताबिक सीमा विवाद, व्यापार घाटा और चीनी निवेश पर रोक जैसे मुद्दों पर बात होगी।
- *पुतिन से क्या बात होगी:* समिट से एक दिन पहले ही पीएम मोदी और पुतिन की द्विपक्षीय बैठक होगी। रूस के व्यापार मंत्री एंटोन अलिखानोव पहले से ही दिल्ली में हैं। भारत का लक्ष्य रूस के साथ व्यापार को 60 अरब डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक 100 अरब डॉलर तक ले जाना है।
*'अमेरिका से 3 गुना बड़ी इकोनॉमी' का सच क्या है?*
सोशल मीडिया पर दावा है कि ब्रिक्स की इकोनॉमी अमेरिका से 3 गुना बड़ी हो गई है। हकीकत ये है कि:
ब्रिक्स देशों (अब 10 सदस्य) की कुल जीडीपी (PPP - खरीद शक्ति के आधार पर) दुनिया की 37% से ज्यादा हो गई है, जो G-7 देशों (29%) से ज्यादा है। राष्ट्रपति पुतिन ने इसे 60 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा बताया था। लेकिन नॉमिनल जीडीपी में अमेरिका आज भी दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी है। इसलिए 3 गुना वाला आंकड़ा PPP के संदर्भ में देखा जा रहा है।
*समिट में क्या होगा?*
भारत ने इस बार की थीम "Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability" रखी है। एजेंडे में 4 बड़ी बातें हैं:
1. डॉलर पर निर्भरता कम करना और अपनी मुद्रा में व्यापार
2. सभी देशों के UPI जैसे पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ना
3. न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) से विकासशील देशों को ज्यादा फंड देना
4. सप्लाई चेन और एनर्जी सिक्योरिटी पर नया प्लान
*भारत के लिए चुनौती*
भारत के लिए ये समिट एक अग्निपरीक्षा भी है। एक तरफ भारत QUAD का हिस्सा है और अमेरिका के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी मजबूत है, दूसरी तरफ उसे रूस और चीन के साथ भी रिश्ते संभालने हैं। भारत की कोशिश है कि ब्रिक्स को अमेरिका-विरोधी मंच न बनने दिया जाए।
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