2035 तक भारत का अपना स्पेस स्टेशन, 2040 में चांद पर भारतीय भेजने का लक्ष्य

नई दिल्ली। भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं को लेकर बड़ा ऐलान किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेरिस में आयोजित इंटरनेशनल स्पेस समिट को वीडियो संदेश के जरिए संबोधित करते हुए कहा कि भारत का लक्ष्य 2035 तक अपना स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करना और 2040 तक किसी भारतीय को चंद्रमा पर भेजना है। प्रधानमंत्री ने अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमताओं और दुनिया के अन्य देशों के साथ सहयोग पर भी जोर दिया।

Sep 11, 2026 - 11:59
2035 तक भारत का अपना स्पेस स्टेशन, 2040 में चांद पर भारतीय भेजने का लक्ष्य

नई दिल्ली:- भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं को लेकर बड़ा ऐलान किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेरिस में आयोजित इंटरनेशनल स्पेस समिट को वीडियो संदेश के जरिए संबोधित करते हुए कहा कि भारत का लक्ष्य 2035 तक अपना स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करना और 2040 तक किसी भारतीय को चंद्रमा पर भेजना है। प्रधानमंत्री ने अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमताओं और दुनिया के अन्य देशों के साथ सहयोग पर भी जोर दिया।

भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन बनेगा बड़ी उपलब्धि

भारत जिस अंतरिक्ष स्टेशन की दिशा में आगे बढ़ रहा है, उसे भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station) के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह एक मॉड्यूलर अंतरिक्ष स्टेशन होगा, जिसे चरणबद्ध तरीके से अंतरिक्ष में स्थापित करने की योजना है। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष में लंबे समय तक वैज्ञानिक प्रयोग, मानव अंतरिक्ष मिशन और अत्याधुनिक अनुसंधान के लिए भारत को अपना स्थायी प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना है।

स्पेस स्टेशन की दिशा में पहला बड़ा आधार गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन है। मानव को अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता हासिल करना भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के संचालन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

2040 तक चांद पर भारतीय भेजने की तैयारी

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के अगले बड़े लक्ष्य के रूप में 2040 तक भारतीय को चंद्रमा पर भेजने की बात कही। इसका अर्थ है कि भारत अब केवल चंद्रमा पर रोवर और लैंडर भेजने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि मानव अंतरिक्ष उड़ान के क्षेत्र में भी अपनी क्षमता को अगले स्तर तक ले जाना चाहता है।

चंद्रमा पर मानव मिशन के लिए जीवन-समर्थन प्रणाली, अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण, सुरक्षित लॉन्च और वापसी, डॉकिंग तकनीक तथा लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने की क्षमता विकसित करना महत्वपूर्ण होगा।

ISRO के साथ बढ़ेगी निजी क्षेत्र की भूमिका

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में अब सरकारी संस्थानों के साथ निजी कंपनियों की भागीदारी भी बढ़ रही है। हाल ही में ISRO ने स्पष्ट किया है कि निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका के बावजूद ISRO देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम की प्रमुख संस्था बना रहेगा। IN-SPACe के चेयरमैन पवन गोयनका ने भी कहा है कि ISRO भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र की बुनियाद बना रहेगा।

इस बदलाव का उद्देश्य भारत के पूरे स्पेस इकोसिस्टम को बड़ा बनाना है, ताकि रॉकेट निर्माण, सैटेलाइट, लॉन्च सेवाओं और अंतरिक्ष तकनीक में निजी कंपनियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भी जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरिक्ष क्षेत्र में वैश्विक सहयोग को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भारत दुनिया के अन्य देशों के साथ मिलकर अंतरिक्ष के नए क्षेत्रों की खोज करना चाहता है। उन्होंने अंतरिक्ष को शांतिपूर्ण, टिकाऊ और पूरी मानवता के हित में इस्तेमाल करने की जरूरत पर जोर दिया।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत अब तक 34 देशों के 430 पेलोड को अंतरिक्ष में स्थापित कर चुका है, जो भारत की लॉन्च क्षमता और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग में बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए क्यों अहम है 2035 का लक्ष्य?

2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करना भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में ले जाएगा, जिनके पास अंतरिक्ष में अपना स्थायी मानव अनुसंधान प्लेटफॉर्म होगा। इससे भारत को माइक्रोग्रैविटी में वैज्ञानिक प्रयोग, नई अंतरिक्ष तकनीकों का परीक्षण और भविष्य के चंद्र एवं गहरे अंतरिक्ष अभियानों की तैयारी में मदद मिल सकती है।

भारत की अंतरिक्ष यात्रा अब केवल उपग्रह प्रक्षेपण तक सीमित नहीं है। गगनयान से लेकर भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और फिर चंद्रमा पर मानव मिशन तक, देश ने अगले डेढ़ दशक के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप सामने रखा है।

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