पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 81 आयुध सिपाहियों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

पटना: पटना हाईकोर्ट ने 81 आयुध (आर्मरर) सिपाहियों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से 11 साल तक चुनौती नहीं देने को महत्वपूर्ण आधार माना। अदालत ने कहा कि इतने लंबे समय तक आवेदक सोते रहे और दूसरे मामले में फैसला आने के बाद अब जागे हैं, ऐसे में उन्हें राहत नहीं दी जा सकती।

Sep 11, 2026 - 21:47
पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 81 आयुध सिपाहियों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

पटना:-पटना हाईकोर्ट ने 81 आयुध (आर्मरर) सिपाहियों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से 11 साल तक चुनौती नहीं देने को महत्वपूर्ण आधार माना। अदालत ने कहा कि इतने लंबे समय तक आवेदक सोते रहे और दूसरे मामले में फैसला आने के बाद अब जागे हैं, ऐसे में उन्हें राहत नहीं दी जा सकती।

जस्टिस रितेश कुमार की एकलपीठ ने प्रदीप राम एवं अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद इन्हें रद्द कर दिया।

दरअसल, वर्ष 2014 में 181 आर्मरर सिपाही पदों के लिए लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। इसमें 213 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। रोस्टर के आधार पर 132 अभ्यर्थियों का चयन किया गया, जबकि 81 अभ्यर्थी रोस्टर क्लीयरेंस के कारण नियुक्ति से बाहर रह गए।

बिहार पुलिस मेन्स एसोसिएशन की आपत्ति के बाद तत्कालीन डीजीपी ने इस संबंध में गृह विभाग से मार्गदर्शन मांगा था। गृह विभाग ने पत्र संख्या 1550 जारी कर कहा था कि यह प्रक्रिया सीधी नियुक्ति या प्रोन्नति के तहत नहीं आती, इसलिए इसमें रोस्टर क्लीयरेंस की आवश्यकता नहीं है। इसके बाद शेष 81 अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति दी गई और वरीयता सूची जारी कर दी गई।

याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि हाईकोर्ट के एक अन्य मामले में आर्मरर चयन में रोस्टर लागू होने की बात कही गई है और 231 अभ्यर्थियों का चयन रद्द किया गया था। इसलिए उसी सिद्धांत को उनके मामले में भी लागू किया जाना चाहिए।

वहीं, राज्य सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि जिन 81 आयुध सिपाहियों की नौकरी प्रभावित हो सकती है, उनमें से किसी को भी मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया है।

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि विलंब, लैचेज और आवश्यक पक्षकारों को शामिल नहीं करने के आधार पर याचिकाएं खारिज की जा सकती हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि करीब 11 वर्षों तक नियुक्ति को चुनौती नहीं देना सहमति (acquiescence) माना जाएगा।

इस आधार पर पटना हाईकोर्ट ने 81 आयुध सिपाहियों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया।

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