रतन वर्मा को ‘बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान’ दिए जाने पर साहित्यकारों में हर्ष

रतन वर्मा झारखंड के ही नहीं अपितु राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी हिंदी के एक नामचीन लेखक के रूप में उभर कर सामने आए हैं ।

रतन वर्मा को ‘बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान’ दिए जाने पर साहित्यकारों में हर्ष

जाने-माने कथाकार, कवि, साहित्यकार रतन वर्मा को पटना में जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान सभा गृह में ‘बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान समारोह’ (आरा)के तत्वाधान में आयोजित एक समारोह में ‘बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान’ प्रदान कर अलंकृत किया गया है। यह सम्मान उन्हें वर्ष 2022 हेतु उत्कृष्ट कथा लेखन के लिए प्रदान किया गया है । सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि प्रख्यात साहित्यकार आलोक धनवा एवं रामधारी सिंह दिवाकर ने पुष्प गुच्छ, अंग वस्त्र, स्मृति चिन्ह और ‘प्रशस्ति पत्र’ प्रदान कर अलंकृत किया। ‘कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्यकार मदन कश्यप एवं ऋषिकेश सुलभ , उद्घाटन रांची के प्रख्यात साहित्यकार रवि भूषण, संचालन आलोचक सुधीर सुमन ने किया। आयोजित कार्यक्रम में काफी संख्या में झारखंड और बिहार के साहित्यकार सम्मिलित हुए।
कथाकार रतन वर्मा को ‘बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान’ से अलंकृत किए जाने पर हजारीबाग के साहित्यकारों ने हर्ष व्यक्त किया है।
साहित्यिक संस्था ‘परिवेश’ के संयोजक विजय केसरी ने कहा कि रतन वर्मा झारखंड के ही नहीं अपितु राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी हिंदी के एक नामचीन लेखक के रूप में उभर कर सामने आए हैं ।उनका रचना संसार बहुत ही विस्तृत है। उनकी एक और कहानी गरीबों के बहते पसीने पर ‘गुलबिया’दर्ज है । वहीं दूसरी ओर जात-पात की संकीर्णताओं पर ‘कमजोर जात’ कहानी प्रहार करती नजर आती है। रतन वर्मा बीते चालीस वर्षों से लगातार लिखते चले आ रहे हैं। ‘बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान’ उनके कंधों एक बड़ी जवाब देही दे दी है।
कथाकार डॉ विकास कुमार ने कहा कि रतन वर्मा को ‘बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान’ दिए जाने से संपूर्ण देश में साहित्यकारों के बीच एक खुशी की लहर देखी जा रही है । रतन वर्मा एक बड़े लेखक के साथ-साथ सहज सरल व्यक्ति हैं । नव लेखकों को लेखन से जोड़ने में उनकी महती भूमिका रहती है । आज मैं जो कुछ भी लेखन के क्षेत्र में कर पाया हूं,उसमें रतन सर का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान है।
कथाकार भैया विवेक प्रियदर्शी ने कहा कि मैं भी सम्मान समारोह सम्मिलित होना चाहता था। मैं अपनी आंखों से रतन सर को सम्मानित होते देखना चाहता था । लेकिन ऐसी परिस्थिति बन नहीं पाई । रतन वर्मा इस सम्मान के सबसे उपयुक्त कथाकार हैं। उनका अब तक का जीवन हिंदी साहित्य को समर्पित है। आगे इसी तरह गतिशील बने रहें । यह कामना करता हूं।
कथाकार सुबोध सिंह ‘शिवगीत’ ने कहा है कि रतन वर्मा जिन परिस्थितियों में यह सम्मान लेने के लिए पटना पहुंचे, उनके लिए वहां पहुंचना कठिन साध्य रहा होगा। ‘बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान समारोह’ के आयोजकों की ज़िदऔर स्नेह ने उन्हें पटना पहुंचा दिया। रतन वर्मा का लेखकीय जीवन बहुत ही संघर्ष से भरा रहा है। वे अपनी कहानियों में जिन मूल्यों और सिद्धांतों को स्थापित करते हैं, हमेशा उन्हीं सिद्धांतों और मूल्यों की रक्षा करते नजर आते हैं।