पितृपक्ष मेला की तैयारी को लेकर नगर निगम की बैठक, लापरवाही पर कार्रवाई के निर्देश, सफाई, रोशनी और पेयजल व्यवस्था पर विशेष जोर; 170 ठेला रिक्शा, 1500 डस्टबिन और 60 हाईटिपर खरीदने का निर्णय
गयाजी। नगर निगम सभागार में शनिवार को मेयर वीरेंद्र कुमार उर्फ गणेश पासवान की अध्यक्षता में सशक्त स्थायी समिति की बैठक हुई। बैठक का संचालन समिति के सदस्य डॉ. अखौरी ओंकार नाथ उर्फ मोहन श्रीवास्तव ने किया। बैठक में आगामी पितृपक्ष मेला की तैयारियों की समीक्षा करते हुए सफाई, रोशनी, पेयजल, कचरा प्रबंधन और तीर्थयात्रियों की सुविधा पर विशेष चर्चा की गई।
बैठक में डिप्टी मेयर चिंता देवी, नगर आयुक्त डॉ. गगन कुमार, सशक्त स्थायी समिति के सदस्य डॉ. अखौरी ओंकार नाथ उर्फ मोहन श्रीवास्तव, मनोज कुमार, विनोद कुमार यादव, सारिका कुमारी सहित अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।
पितृपक्ष मेला 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक चलेगा। मेयर ने कहा कि सनातन धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व है और गयाजी की पहचान भी पितृपक्ष से जुड़ी है। इस दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पिंडदान और तर्पण के लिए गयाजी पहुंचते हैं। ऐसे में नगर निगम श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह तैयार है।
मेला क्षेत्र में चकाचक सफाई और बेहतर रोशनी की व्यवस्था
मेयर ने कहा कि मेला क्षेत्र में सफाई आउटसोर्सिंग के माध्यम से कराई जाएगी। सफाई व्यवस्था ऐसी रहेगी कि पूरा मेला क्षेत्र स्वच्छ और व्यवस्थित दिखाई दे। खराब स्ट्रीट लाइट और रोपवे लाइट को दुरुस्त करने के लिए टीम गठित की गई है। जरूरत पड़ने पर नई लाइट भी लगाई जाएगी, ताकि रात में मेला क्षेत्र रोशनी से जगमगाता रहे और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
कचरे पर किया जाएगा इत्र का छिड़काव
मेला क्षेत्र में निकलने वाले कचरे से दुर्गंध न फैले, इसके लिए कचरे पर इत्र का छिड़काव कराया जाएगा। कचरे को पूरी तरह ढककर रखने की व्यवस्था की जाएगी। मेयर ने कहा कि मेला क्षेत्र में सफाई सबसे महत्वपूर्ण है। सफाईकर्मियों को ड्रेस कोड में रहकर कार्य करना होगा। सफाई व्यवस्था में लापरवाही मिलने पर संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि मेला क्षेत्र का प्रतिदिन निरीक्षण किया जाएगा और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
वाटर एटीएम की खरीद में देरी पर भड़के मेयर
मेला क्षेत्र में शीतल पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 17 सोलर वाटर एटीएम लगाने का निर्णय पूर्व की बैठक में लिया गया था। इसके बावजूद अब तक खरीदारी नहीं होने पर मेयर गणेश पासवान और सशक्त स्थायी समिति के सदस्य मोहन श्रीवास्तव ने संबंधित कार्यपालक अभियंता राकेश कुमार और सहायक अभियंता सोनम कुमारी के प्रति नाराजगी जताई।
वाटर प्याऊ के निर्माण में देरी पर भी उन्होंने इसे गंभीर लापरवाही बताया। उन्होंने कहा कि पितृपक्ष मेला शुरू होने में कुछ ही दिन शेष हैं और ऐसे समय में आवश्यक सामग्री की खरीदारी नहीं होना गंभीर मामला है।
बैठक में कार्यपालक अभियंता से स्पष्टीकरण मांगने तथा सहायक अभियंता सोनम कुमारी के विरुद्ध प्रपत्र ‘क’ गठित करने का निर्णय लिया गया। उन पर दो तालाबों के सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू नहीं कराने का भी आरोप लगाया गया।
170 ठेला रिक्शा और 1500 डस्टबिन खरीदने का निर्णय
शहर की सफाई व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए कई सफाई उपकरणों की खरीदारी का निर्णय लिया गया। इसके तहत 170 ठेला रिक्शा, 1500 डस्टबिन, 60 हाईटिपर और दो मिनी जेसीबी मशीन खरीदी जाएंगी। इन संसाधनों को वार्डों में उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे सफाई व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सके।
फाउंटेन के जरिए बताई जाएगी माता सीता और राजा दशरथ के पिंडदान की महत्ता
देवघाट स्थित फल्गु नदी में माता सीता और राजा दशरथ के पिंडदान से जुड़ी धार्मिक एवं पौराणिक महत्ता को आकर्षक तरीके से श्रद्धालुओं तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है।
मोहन श्रीवास्तव ने बताया कि पानी के फाउंटेन के माध्यम से ऑडियो-वीडियो प्रस्तुति के जरिए माता सीता के गयाजी आगमन और पिंडदान की महत्ता श्रद्धालुओं को बताई जाएगी। इससे देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों को गयाजी की धार्मिक और पौराणिक महत्ता को समझने में मदद मिलेगी।
स्वच्छता पदाधिकारी शुभम कुमार पर विभागीय कार्रवाई का निर्णय
डीजल आपूर्ति और नाला सफाई से जुड़े मामलों को लेकर स्वच्छता पदाधिकारी शुभम कुमार पर भी बैठक में गंभीर नाराजगी जताई गई। उन पर निर्धारित मात्रा से अधिक डीजल की आपूर्ति कराने और नालों की समय पर सफाई नहीं कराने के आरोप लगाए गए।
इसके अलावा नियमों के विपरीत बाहरी लोगों से निगम की बहाली से संबंधित कार्य कराने तथा स्वनिधि की राशि से अनुचित खर्च किए जाने के आरोपों पर भी चर्चा हुई।
बैठक में स्वच्छता पदाधिकारी शुभम कुमार की सेवा वापस करने का निर्णय लिया गया। साथ ही उनके विरुद्ध प्रपत्र ‘क’ गठित कर विभागीय कार्रवाई के लिए आवश्यक पत्राचार करने का आदेश दिया गया। बैठक में स्पष्ट किया गया कि उन्हें आगे कोई कार्य नहीं सौंपा जाएगा।