तेजस्वी यादव की रणनीति में रामविलास, शरद और रघुवंश की विरासत, एक दांव से कई सियासी संदेश
बिहार की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी विरासत और सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की रणनीति में अब ऐसे नेताओं की राजनीतिक विरासत भी नजर आ रही है, जिन्होंने अलग-अलग दौर में बिहार की राजनीति पर गहरा प्रभाव छोड़ा है। इनमें रामविलास पासवान, शरद यादव और रघुवंश प्रसाद सिंह जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
बिहार की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी विरासत और सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की रणनीति में अब ऐसे नेताओं की राजनीतिक विरासत भी नजर आ रही है, जिन्होंने अलग-अलग दौर में बिहार की राजनीति पर गहरा प्रभाव छोड़ा है। इनमें रामविलास पासवान, शरद यादव और रघुवंश प्रसाद सिंह जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
तेजस्वी यादव इन नेताओं की विरासत का जिक्र कर एक साथ कई राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। रामविलास पासवान के जरिए दलित राजनीति, शरद यादव के जरिए पिछड़ा वर्ग और समाजवादी राजनीति, जबकि रघुवंश प्रसाद सिंह के जरिए ग्रामीण बिहार और सामाजिक न्याय की राजनीति से जुड़ने की कोशिश के तौर पर इसे देखा जा रहा है।
दरअसल, बिहार की चुनावी राजनीति में जातीय और सामाजिक समीकरण हमेशा से अहम भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच प्रभाव रखने वाले पुराने नेताओं की विरासत को अपने राजनीतिक विमर्श में शामिल करना तेजस्वी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
तेजस्वी यादव के इस सियासी रुख से यह संदेश देने की कोशिश दिख रही है कि आरजेडी केवल अपने पारंपरिक वोट बैंक तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि व्यापक सामाजिक गठजोड़ तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
अब देखना यह होगा कि इन दिग्गज नेताओं की राजनीतिक विरासत को अपने साथ जोड़ने की तेजस्वी की कोशिश चुनावी मैदान में कितना असर डालती है और क्या इससे आरजेडी को अलग-अलग सामाजिक वर्गों के बीच अपना आधार मजबूत करने में सफलता मिलती है।
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