11वें आयुर्वेद दिवस पर कार्यक्रम, स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद अपनाने पर जोर

रांची: 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर बुधवार को “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में आयुर्वेद के महत्व, स्वस्थ जीवनशैली और आयुष चिकित्सा पद्धति को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।

Sep 23, 2026 - 18:22
11वें आयुर्वेद दिवस पर कार्यक्रम, स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद अपनाने पर जोर

रांची:- 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर बुधवार को “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में आयुर्वेद के महत्व, स्वस्थ जीवनशैली और आयुष चिकित्सा पद्धति को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए निदेशक आयुष दिनेश कुमार यादव ने कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन, वैज्ञानिक और समग्र चिकित्सा पद्धति है। यह केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या, स्वस्थ जीवनशैली और मानसिक शांति के माध्यम से निरोगी जीवन जीने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली, अनियमित खान-पान, तनाव और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच आयुर्वेद की उपयोगिता और बढ़ गई है। आयुर्वेद को जन-जन तक पहुंचाने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है।

निदेशक ने ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत आयुष कर्मियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वे स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी परामर्श, योग, औषधीय पौधों और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति लोगों को जागरूक कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि आयुर्वेद दिवस केवल औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि आयुर्वेद के सिद्धांतों को दैनिक जीवन में अपनाने का संकल्प लेने का अवसर है। उन्होंने आयुष पदाधिकारियों और कर्मियों से निष्ठा एवं संवेदनशीलता के साथ गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की अपील की।

कार्यक्रम में डॉ. वकील कुमार सिंह, निबंधक, झारखंड राज्य आयुष चिकित्सा परिषद ने आयुर्वेद के महत्व पर जानकारी साझा की। वहीं उप निदेशक (आयुर्वेद) डॉ. कृष्ण कुमार ने आयुर्वेद के माध्यम से लोगों तक स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने के विभिन्न उपायों की जानकारी दी।

इस अवसर पर औषधीय पौधों का रोपण भी किया गया। कार्यक्रम में शिवजी वर्मा सहित आयुष निदेशालय, जिला संयुक्त औषधालय, रांची जिले में कार्यरत आयुष सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी, योग प्रशिक्षक और अन्य कर्मी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन डॉ. कृष्ण कुमार के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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