मलेशिया में फंसे सीमांचल के मजदूरों का आरोप- फर्जी टूर वीजा पर भेजा गया, 16 मजदूर लौटे घर
पूर्णिया: रोजगार की तलाश में मलेशिया गए पूर्णिया और सीमांचल के कई मजदूरों के जेल में बंद होने का मामला सामने आया है। इनमें से पूर्णिया, किशनगंज और अररिया के 16 मजदूर किसी तरह जुर्माना भरकर भारत लौट आए हैं। मलेशिया में गिरफ्तार किए गए मजदूरों का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वे ट्रैवल एजेंट पर गलत तरीके से मलेशिया भेजने का आरोप लगा रहे हैं।
पूर्णिया: रोजगार की तलाश में मलेशिया गए पूर्णिया और सीमांचल के कई मजदूरों के जेल में बंद होने का मामला सामने आया है। इनमें से पूर्णिया, किशनगंज और अररिया के 16 मजदूर किसी तरह जुर्माना भरकर भारत लौट आए हैं। मलेशिया में गिरफ्तार किए गए मजदूरों का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वे ट्रैवल एजेंट पर गलत तरीके से मलेशिया भेजने का आरोप लगा रहे हैं।
मलेशिया से लौटे मजदूरों और उनके परिजनों ने पूर्व विधायक मास्टर मुजाहिद के साथ पूर्णिया आईजी को आवेदन देकर मामले की शिकायत की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि रौटा निवासी ट्रैवल एजेंट हाजी नाहिद गनी ने रोजगार दिलाने के नाम पर मजदूरों को कथित तौर पर फर्जी टूरिस्ट वीजा के जरिए मलेशिया भेजा।
मजदूरों का आरोप है कि मलेशिया पहुंचने के बाद पाकिस्तानी एजेंट अशरफ द्वारा उनके साथ कथित तौर पर मारपीट और टॉर्चर किया गया। मजदूरों के मुताबिक वे मानव तस्करी के लिए चर्चित डंकी रूट के जरिए समुद्र और जंगल के रास्ते मलेशिया पहुंचे थे। वहां एक फैक्ट्री में काम करने के दौरान वैध दस्तावेज नहीं होने के कारण कई मजदूरों को मलेशिया पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। कुछ मजदूर गिरफ्तारी से बचने के लिए जंगल में छिपकर रहने को मजबूर हुए।
पूर्व विधायक मास्टर मुजाहिद ने आरोप लगाया कि रौटा में ट्रैवल एजेंसी के जरिए लोगों से कथित तौर पर दो-दो लाख रुपये लेकर रोजगार के नाम पर विदेश भेजा जाता है। उन्होंने दावा किया कि इससे पहले 20 अगस्त को रौटा और कोचाधामन के कुछ लोगों को दुबई में बंधक बनाए जाने का मामला भी सामने आया था।
वहीं, ट्रैवल एजेंट नाहिद गनी ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि वह ट्रैवल एजेंसी चलाते हैं और लोगों को रोजगार के लिए विदेश भेजते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक कारणों से उन्हें फंसाया जा रहा है।
अब मजदूरों की शिकायत के बाद पुलिस और प्रशासन मामले की जांच में जुटे हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विदेश भेजने की प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ था या नहीं।
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