शब्दवीणा की मासिक साहित्यिक भेंटवार्ता 'एक शाम साहित्य के नाम' के अक्टूबर अंक का हुआ आयोजन, आमंत्रित रचनाकार के रूप में फरीदाबाद के रचनाकार प्रभु दयाल खट्टर रहे

राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था 'शब्दवीणा' की हरियाणा प्रदेश समिति एवं फरीदाबाद जिला समिति द्वारा आयोजित होने वाली मासिक भेंटवार्ता "एक शाम साहित्य के नाम" के अक्टूबर माह के अंक में आमंत्रित साहित्यकार के रूप में फरीदाबाद, हरियाणा के रचनाकार प्रभु दयाल खट्टर रहे।

Oct 22, 2026 - 18:43
शब्दवीणा की मासिक साहित्यिक भेंटवार्ता 'एक शाम साहित्य के नाम' के अक्टूबर अंक का हुआ आयोजन, आमंत्रित रचनाकार के रूप में फरीदाबाद के रचनाकार प्रभु दयाल खट्टर रहे

गया जी। राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था 'शब्दवीणा' की हरियाणा प्रदेश समिति एवं फरीदाबाद जिला समिति द्वारा आयोजित होने वाली मासिक भेंटवार्ता "एक शाम साहित्य के नाम" के अक्टूबर माह के अंक में आमंत्रित साहित्यकार के रूप में फरीदाबाद, हरियाणा के रचनाकार प्रभु दयाल खट्टर रहे। वार्ताकार के रूप में कार्यक्रम की संयोजिका शब्दवीणा हरियाणा प्रदेश सचिव सरोज कुमार ने भूमिका निभाई। श्रीमती सरोज ने श्री खट्टर का संक्षिप्त परिचय देते हुए शब्दवीणा मंच पर हार्दिक अभिनंदन किया। समाज तथा साहित्य पर आधारित विभिन्न रोचक प्रश्नों के माध्यम से भेंटवार्ता आगे बढ़ी। श्री खट्टर ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों एवं साहित्य की समझ को साझा करते हुए कहा कि कविता अंतर्आत्मा से स्वतः फूटती है। उन्होंने अमेरिकी कवि रॉबर्ट फ्रॉस्ट की चर्चित कविता "स्टॉपिंग बाई वुड्स अॉन अ स्नोई इवनिंग" की प्रसिद्ध पंक्तियाँ "द वुड्स आर लवली, डॉर्क, एण्ड डीप। बट आई हैव प्रॉमिसेज टू कीप। एण्ड माइल्स टू गो, बिफोर आई स्लीप, एण्ड माइल्स टू गो, बिफोर आई स्लीप" का स्मरण करते हुए आज के युवाओं को अच्छी पुस्तकों के सान्निध्य में रहने का संदेश दिया। उन्हें युवाओं को जीवन में आने वाली चुनौतियों से संघर्ष करते रहने की सीख दी। प्रभु दयाल खट्टर ने वार्ताकार सरोज कुमार एवं शब्दवीणा की राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी को शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में आमंत्रित करने के लिए समस्त शब्दवीणा परिवार के प्रति हार्दिक आभार जताया। श्री खट्टर की "क्या पूर्व जनम के कर्मों से भी होता हमारा नाता है...क्या कर्म हमारा कुछ भी नहीं, सब कुछ ईश्वर करवाता है?", "मैं लिखता हूँ संघर्षों को, जीवन के उत्कर्षों को," एवं "इस कविता को मैं लिखता हूँ, इस कविता को मैं जीता हूँ" पंक्तियों पर खूब सराहना मिली। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण शब्दवीणा केन्द्रीय फेसबुक पेज से किया गया, जिससे पुरुषोत्तम तिवारी, सुरेश विद्यार्थी, पी. के. मोहन, महावीर सिंह वीर, निगम राज़, डॉ विजय शंकर, डॉ परशुराम तिवारी, ललित शंकर, प्रो. सुनील कुमार उपाध्याय, अरुण अपेक्षित, संतोष कुमार जयंत, बलवंत सिंह, अमित उप्पल एवं डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी सहित देश के विभिन्न प्रदेशों से जुड़े साहित्यानुरागियों ने कार्यक्रम का आनंद उठाया।

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