राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा के निर्माण की गौरवशाली कहानी 

1931 में कांग्रेस द्वारा राष्ट्रीय ध्वज के लिए पारित हुआ स्वराज झंडा।इसके बाद स्वतंत्रता के आंदोलन के अंतर्गत खिलाफत आंदोलन में तीन रंगों के स्वराज झंडे का प्रयोग किया गया।

Jul 23, 2026 - 12:04
राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा के निर्माण की गौरवशाली कहानी 

संविधान सभा में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 22 जुलाई 1947 को वर्तमान तिरंगे झंडे को राष्ट्रीय ध्वज के रूप  में प्रस्तुत किया जिसे सभा ने सर्वसम्मती से पारित किया था। इस राष्ट्रीय ध्वज में तीन रंग थे। ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और नीचे हरा रंगा। सफेद रंग की पट्टी में नीले रंग से बना था अशोक चक्र जिसमें चौबीस तीलियां थीं, जो धर्म और कानून का प्रतिनिधित्व करती थीं। राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का वही स्वरूप आज भी मौजूद है। 1921 में गांधी जी द्वारा राष्ट्रीय ध्वज के लिए इस झंडे की पेशकश की गई थी, जिसमें बापू ने दो रंग के झंडे को राष्ट्रीय ध्वज बनाने की बात कही थी। इस झंडे को मछलीपट्टनम के पिंगली वैंकैया ने बनाया था। दो रंगों में लाल रंग हिन्दू और हरा रंग मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व करता था। बीच में गांधी जी का चरखा था, जो इस बात का प्रमाण था कि भारत का झंडा अपने देश में बने कपड़े से बना।
 1931 में कांग्रेस द्वारा राष्ट्रीय ध्वज के लिए पारित हुआ स्वराज झंडा।इसके बाद स्वतंत्रता के आंदोलन के अंतर्गत खिलाफत आंदोलन में तीन रंगों के स्वराज झंडे का प्रयोग किया गया। खिलाफत आंदोलन में मोतीलाल नेहरू ने इस झंडे को थामा और बाद में कांग्रेस ने 1931 में स्वराज झंडे को ही राष्ट्रीय ध्वज की स्वीकृति दी। स्वराज झंडे पर आधारित तिरंगे झंडे के नियम-कानून फ्लैग कोड ऑफ इंडिया द्वारा बनाए गए। जिसमें निर्धारित था कि झंडे का प्रयोग केवल स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर ही किया जाएगा। जिसमें ऊपर केसरिया बीच में सफेद और नीचे हरा रंग था। साथ ही बीच में नीले रंग से चरखा बना हुआ था। 1947 से वर्तमान तिरंगा ध्वज को स्वतंत्र भारत का राष्ट्रीय ध्वज स्वीकार किया गया। इसके बाद 2002 में नवीन जिंदल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई। जिसके पक्ष में सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार को निर्देश दिए कि अन्य दिनों में भी झंडे का प्रयोग नियंत्रित रूप में हो सकता है। इसके बाद 2005 में जो सुधार हुआ, उसके अंतर्गत कुछ परिधानों में भी तिरंगे झंडे का प्रयोग किया जा सकता है।  भारतीय ध्वज संहिता के प्रावधान के अनुरूप नागरिकों एवं बच्चों से शासन की अपील है कि वे केवल कागज के बने राष्ट्रीय ध्वज का ही उपयोग करें। साथ ही कागज के झंडों को समारोह संपन्न होने के बाद न विकृत किया जाए और न ही जमीन पर फेंका जाए। ऐसे झंडों का निपटान उनकी मर्यादा के अनुरूप ही किया जाना चाहिए।
  भारतवर्ष का हमारा प्यारा तिरंगा राष्ट्रीय ध्वज देश की आन - बान और शान है। तीन रंगों से निर्मित यह राष्ट्रीय ध्वज हमारे स्वाधीनता सेनानियों ने स्वाधीनता संग्राम के दौरान निर्मित किया था।  यह राष्ट्रीय ध्वज देश की आजादी, संप्रभुता और स्वतंत्रता संघर्ष के प्रतीक के रूप में भी जाना जाता है। 15 अगस्त 1947 को जब देश को आजादी मिली थी, ब्रिटिश हुकूमत के यूनियन जैक झंडे को उतर गया था और राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को स सम्मान लहराया गया था।‌ यह पल समस्त देशवासियों के लिए गौरव का पल  था। हर वर्ष 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस  और 26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर संपूर्ण देश में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा स सम्मान  फहराया जाता है। देश की आजादी के बाद हमारे वीर सैनिकों ने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा की शान को बरकरार रखने के लिए जान की बाजी लगाने में कभी भी कोई चूक नहीं किए । आजादी मिलते के साथ ही पाकिस्तान ने युद्ध छेड़ दिया था, वहीं हमारे वीर सैनिकों ने देश की सीमाओं की रक्षा के लिए जो किया था, संपूर्ण देश को सदैव नाज रहेगा। हमारे वीर सैनिक एक हाथ में तिरंगा और दूसरे में बंदूक लिए पाकिस्तान को उबकी औकात बता दी थी। हमारे वीर सैनिक तिरंगा लिए पाकिस्तान तक कूच कर गए थे।
 1962 में जब चीन ने भारत पर दोस्ती के नाम पर आक्रमण कर दिया था, तब भी हमारे वीर सैनिक  तिरंगे की शान को बरकरार रखने के लिए आखरी दम तक लड़ाई लड़े थे। 1971 में पाकिस्तान से हुए युद्ध में हमारे वीर सैकड़ों सैनिक राष्ट्रीय ध्वज लिए पाकिस्तान के अंदर तक घुस गए थे। हमारे जाबांज सैनिकों ने सवा लाख से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों को सरेंडर करने के लिए विवश कर दिया था।  हमारा राष्ट्रीय ध्वज कई  तक पाकिस्तान की सरजमीं पर लहराता रहा था।  यह संपूर्ण विश्व के लिए भारत द्वारा गढ़ा एक अतुलनीय कृतिमान था। हमारा प्यारा तिरंगा वीरता का प्रतीक बन चुका है। हम सबों को राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा निर्माण की गौरवशाली इतिहास से परिचित होना चाहिए। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक तिरंगे की कहानी में कई रोचक मोड़ आए। पहले उसका स्वरूप कुछ और था।आज कुछ और है। 22 जुलाई को राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा झंडे का जन्मदिन है। सच्चे अर्थों में यह दिन समस्त भारतीयों के लिए एक गौरव का दिन है। हम सबों को बहुत ही आदर और सम्मान के साथ इस दिन देश की आन बान और शान राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा के सम्मान में आयोजन करना चाहिए। साथ ही तिरंगा के सामने सामूहिक रूप से राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का गायन करना चाहिए।
   हमारा प्यारा राष्ट्रीय ध्वज कई बदलावों के बाद अपने स्वरूप को निखारता चल रहा है। इसलिए हर भारतीयों का कर्तव्य बनता है कि तिरंगे की आन में कभी कोई कमी नहीं होने दे। तिरंगा हमारे विजय का प्रतीक है। तिरंगा विश्व में हमारा प्रतिनिधित्व करता है।  हम कहीं भी जाते हैं, तिरंगा ही हमारी पहचान होती है। तिरंगा एक प्रहरी के रूप में हमारी सीमाओं की रक्षा करता रहता है।  हमारी सीमाओं पर तिरंगा बड़े ही आन बान और शान के साथ लहराता रहता है।‌ इन दुर्गम पहाड़ियों और ‌बर्फों पर तिरंगे की आन बान और शान को बरकरार रखने के लिए हमारे हजारों - लाखों सैनिक दिन रात पहरा देते रहते हैं।
 हम सबों को यह भी जानना चाहिए कि हमारा राष्ट्रीय ध्वज मात्र तीन रंगों का वस्त्र ही नहीं है, अपितु तो इन रंगों के भी बड़े मायने हैं।  राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के तीन रंगों में केसरिया, सफेद और हरा के मायने हैं, देश के गौरव, मूल्यों और आदर्शों  का अनुपालन जीवन पर्यंत करना है। राष्ट्रीय ध्वज में केसरिया सबसे ऊपर स्थित  है। यह रंग देश के साहस, त्याग और बलिदान को दर्शाता है। यह राष्ट्र के प्रति निस्वार्थ भाव और ऊर्जा का प्रतीक है।सफेद बीच में स्थित यह पट्टी शांति, सत्य और सद्भाव का संकेत है। इसके केंद्र में मौजूद अशोक चक्र हमें धर्म और निरंतर प्रगति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। हरा  सबसे नीचे की पट्टी  है। यह देश की खुशहाली, प्रगति और भूमि की उर्वरता व हरियाली को दर्शाती है। इतने बहुमूल्य और महत्वपूर्ण आदर्शों से हमारा प्यारा तिरंगा ओतप्रोत है । यह देश की खुशहाली और विकास का मार्ग प्रशस्त करता है । लेकिन धीरे-धीरे कर हम सब राष्ट्रीय ध्वज का उद्देश्यों  को भूलते चले जा रहे हैं। एक ओर यह देश भ्रष्टाचार की भीषण समस्या से जूझ रही है।  वहीं भारत की राजनीति सिर्फ और सिर्फ सत्ता के लिए हो रही है। जनसेवा हाथों से फिसलती चली जा रही है। यह देश के चतुर्दिक विकास के लिए कदापि उचित नहीं है। बात-बात पर हम सब एक दूसरे को नीचा दिखाने में जुट जाते हैं। एक दूसरे से लड़ जाते हैं।  देश की तमाम विधान सभा और विधान परिषद किस रूप में चल रही है ? यह  बात किसी से छुपी नहीं रह गई है। राज्यसभा और  लोकसभा रण  क्षेत्र में तब्दील होता चला जा रहा है । इस  विषय  पर समस्त देशवासियों को गंभीरता पूर्वक विचार करने की जरूरत है। हम सबों को राष्ट्रीय ध्वज के आदर्शो के अनुकूल आचरण करने की जरूरत है। तभी हमारा भारत एक संप्रभुता संपन्न देश के रूप में तब्दील हो सकता है, जिसकी कामना हमारे स्वाधीनता सेनानियों ने की थी।

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