रैबीज से बचाव के लिए टीकाकरण और जागरूकता जरूरी
विश्व रैबीज दिवस पर अभय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज अस्पताल में जागरूकता शिविर, 200 से 250 लोगों ने लिया भाग
गयाजी । विश्व रैबीज दिवस के अवसर पर भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए), गया शाखा की ओर से 28 सितंबर को रैबीज जागरूकता अभियान चलाया गया। इसके तहत अभय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज अस्पताल में जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में करीब 200 से 250 लोगों ने भाग लिया। इस दौरान रैबीज से बचाव, टीकाकरण और कुत्ते के काटने पर बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। अभय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज अस्पताल के निदेशक डॉ. ए. एन. राय ने कहा कि रैबीज एक शत-प्रतिशत रोकथाम योग्य बीमारी है, लेकिन समय पर उपचार नहीं मिलने पर यह जानलेवा हो सकती है। उन्होंने कहा कि समय पर टीकाकरण और लोगों में जागरूकता ही इससे बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। आईएमए, गया के अध्यक्ष डॉ. विश्व विजय सिंह ने कहा कि कुत्ते के काटने पर घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोना चाहिए। इसके बाद बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क कर एंटी-रैबीज टीका लगवाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुत्ते के काटने को किसी भी स्थिति में हल्के में नहीं लेना चाहिए। अभय इंस्टीट्यूट के फिजिशियन डॉ. अनुराग मन्ना ने भी रैबीज से बचाव और उपचार के संबंध में लोगों को विस्तृत जानकारी दी। वहीं, आईएमए गया के वरिष्ठ सदस्य डॉ. रामसेवक प्रसाद सिंह ने रैबीज के लक्षण, बचाव और उपचार के बारे में बताया। आईएमए गया के सचिव डॉ. विमलेन्दु विमल ने लोगों से आवारा जानवरों से दूरी बनाए रखने और सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने शिविर में उपस्थित सभी लोगों का धन्यवाद किया। जागरूकता अभियान में करीब 10 डॉक्टर और 30 से 35 पैरामेडिकल कर्मी शामिल रहे। इसके अलावा अस्पताल के एपीओ हॉल तथा करीब 80 से 85 डॉक्टरों के क्लिनिकों में भी रैबीज से बचाव को लेकर जागरूकता अभियान चलाया गया।
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