‘शब्दवीणा’ के कवि सम्मेलन में गूंजीं कविताओं की स्वर-लहरियाँ, दिया गया हिन्दी के प्रति अनुराग का संदेश

प्यार सभी से करता चल, सबकी पीड़ा हरता चल। ख़्वाब नहीं जिन आंँखों में, उनमें रंगत भरता चल, पी जाते समंदर को भी दो घूँट में लीडर, पानी जो समंदर का यूँ खारा नहीं होता

Sep 24, 2026 - 16:34
‘शब्दवीणा’ के कवि सम्मेलन में गूंजीं कविताओं की स्वर-लहरियाँ, दिया गया हिन्दी के प्रति अनुराग का संदेश

गया जी। हिन्दी पखवाड़े के अवसर पर राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘शब्दवीणा’ की पश्चिम बंगाल समिति के तत्वावधान में काशीपुर स्थित श्री सनातन धर्म विद्यालय में एक भव्य कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में हिन्दी भाषा एवं साहित्य के प्रति रुचि और अनुराग उत्पन्न करना तथा हिन्दी के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम का संयोजन एवं समन्वय ‘शब्दवीणा’ की पश्चिम बंगाल प्रदेश समिति के अध्यक्ष रामनाथ बेख़बर, सचिव राम पुकार सिंह, संगठन मंत्री डॉ. शिव प्रकाश दास,उपाध्यक्ष हीरा लाल साव एवं प्रचार मंत्री संजीव कुमार दुबे ने संयुक्त रूप से किया। संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी ने आयोजन को हिन्दी भाषा एवं साहित्य के प्रसार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए अपनी शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। कार्यक्रम का शुभारंभ कवि आलोक चौधरी द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। वरिष्ठ साहित्यकार चन्द्रिका प्रसाद पाण्डेय ‘अनुरागी’ ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। मुजफ्फरपुर से आए सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. संजय पंकज मुख्य अतिथि तथा राधेश्याम सिंह एवं डॉ. सुशीला ओझा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन रामनाथ बेख़बर ने किया। शब्दवीणा पश्चिम बंगाल प्रदेश समिति के संरक्षक पुरुषोत्तम तिवारी ने सभी प्रतिभागियों को हिन्दी पखवाड़े की शुभकामनाएं दीं। मुख्य अतिथि डॉ. संजय पंकज को शॉल ओढ़ाकर तथा माँ सरस्वती का भव्य चित्र भेंटकर सम्मानित किया गया। कवि सम्मेलन में प्रतिभागी रचनाकार के रूप में डॉ. संजय पंकज, चन्द्रिका प्रसाद पाण्डेय ‘अनुरागी’, हीरालाल साव, शिप्रा मिश्रा, डॉ. शिव प्रकाश दास, रंजीत भारती, डॉ. शाहिद फ़रोग़ी, राम पुकार सिंह, देवेश मिश्रा, आलोक चौधरी एवं रामनाथ बेख़बर ने एक से बढ़कर एक रचनाएँ प्रस्तुत कीं। साहित्यिक वातावरण को जीवंत बना दिया। मुख्य अतिथि संजय पंकज के गीत "प्यार सभी से करता चल, सबकी पीड़ा हरता चल। ख्वाब नहीं जिन आंखों में, उनमें रंगत भरता चल" ने सभी का मन मोह लिया। वरिष्ठ कवि ‘अनुरागी’ की "भरा-पूरा मेरा परिवार, पर व्यवहार नहीं, कमाई हो भले हज़ार, पर व्यवहार नहीं”, रामनाथ बेख़बर की “पी जाते समंदर को भी दो घूँट में लीडर, पानी जो समंदर का यूँ खारा नहीं होता', डॉ. शाहिद फ़रोग़ी की "अदब के शौक़ में कुछ पैसे ख़र्च होते हैं ‘शाहिद’, कभी दुकान से किताबें भी मोलकर रखिए” हीरालाल साव की “हम दोनों साथ ही पैदा हुए, साथ ही बड़े हुए, पर ज़िंदगी की दौड़ में वह मुझसे बहुत आगे हो गया" पंक्तियों को खूब वाहवाहियाँ मिलीं। रंजीत भारती ने “आओ मनाएँ हम सब हिंदी दिवस ये प्यारा, धड़कन हमारी कहती—हिन्दी है दिल हमारा” तथा राम पुकार सिंह ‘पुकार ग़ाज़ीपुरी’ ने “भाषा है हिन्दी हिन्द की, सम्मान कीजिए, अंधे बन स्वार्थ में नहीं, अपमान कीजिए” ए्वं देवेश मिश्रा ने "नदिया की धाराओं-सी हिन्दी सबका संगम है, सरस स्नेह का कल्पतरु है, हिन्दी भाषा अनुपम है" सुनाकर हिन्दी के प्रति अपनी श्रद्धा निवेदित की। कवयित्री शिप्रा मिश्रा ने “चिड़िया की सुरक्षा पर लग गया है प्रश्नचिह्न, क्या खाएगी और क्या लेकर जाएगी परदेस” एवं डॉ. शिव प्रकाश दास ने ‘चिड़ियाघर’ शीर्षक कविता सुनाकर श्रोताओं से खूब प्रशंसा बटोरी। आलोक चौधरी ने “एक बार तो वंदे मातरम् बोल ज़रा” सुनाया। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि श्री पंकज ने नई पीढ़ी को हिन्दी भाषा और साहित्य से जोड़ने की बात कही। कहा कि साहित्यिक आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों में भाषा के प्रति रुचि और आत्मीयता विकसित होती है। साहित्यिक आयोजन भाषायी संस्कार, रचनात्मक अभिव्यक्ति, साहित्यिक चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने ‘शब्दवीणा’ द्वारा हिन्दी के प्रचार-प्रसार तथा विद्यार्थियों को साहित्य से जोड़ने के प्रयासों की सराहना की। बच्चों को संबोधित करते हुए डॉ. सुशीला ओझा ने कहा कि बंगभूमि हिन्दी साहित्य का तीर्थ है। रवींद्रनाथ के ‘जन गण मन’ और ‘आमार सोनार बांग्ला’ मातृभाषा में मातृभूमि का उद्गार हैं, तो बंकिमचंद्र का ‘वंदे मातरम्’ इसी धरती की हृदय-ध्वनि है। उन्होंने कहा कि ब्रजभाषा की गोद से हिन्दी का विकास हुआ। 1350 से 1650 के मध्य संत कवियों ने कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से कटक तक जनमानस को जोड़ने का कार्य किया। चैतन्य महाप्रभु, वल्लभाचार्य, मीराबाई, शंकरदेव, गुरु नानक, कबीर और तुलसी ने लोकभाषा को समृद्ध कर हिंदी की सामाजिक बुनियाद को सुदृढ़ किया। धन्यवाद ज्ञापन पुरुषोत्तम तिवारी ने किया। उन्होंने आयोजन को सफल एवं सार्थक बताया। कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधान शिक्षक मो. शमीम अनवर सहित अतनु तालपात्रो, गौतम कुमार राणा, विनोद कुमार दुबे, सत्येंद्र कुमार राय आदि उपस्थित रहे। साहित्य और संस्कृति से ओत-प्रोत इस आयोजन ने विद्यार्थियों में हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रति रुचि और रचनात्मक चेतना को बढ़ावा दिया तथा हिंदी पखवाड़े के आयोजन को सार्थकता प्रदान की। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण शब्दवीणा केन्द्रीय फेसबुक पेज से किया गया, जिससे देश के विभिन्न प्रदेशों से जुड़े साहित्यानुरागियों ने कार्यक्रम का आनंद उठाया।

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