शब्दवीणा सृजन त्रिविधा में गया, पटना एवं दिल्ली के रचनाकारों ने पढ़ीं रचनाएँ
गया जी। राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था 'शब्दवीणा' द्वारा आयोजित साप्ताहिक साहित्यिक गोष्ठी "शब्दवीणा सृजन त्रिविधा" में पटना से शब्दवीणा के पटना जिला साहित्य मंत्री वरिष्ठ कवि प्रो डॉ सुनील कुमार उपाध्याय, दिल्ली से शब्दवीणा की दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष वरिष्ठ कवयित्री आशा दिनकर एवं गया जी से शब्दवीणा के गया जिला प्रचार मंत्री कवि अजय कुमार वैद्य ने बूंद, बादल, बरसात, पेड़-पौधे, प्रकृति, धरती, एवं विभिन्न सामाजिक समस्याओं व समसामयिक विषयों पर अपनी रचनाएँ पढ़ीं। कार्यक्रम का संयोजन एवं समन्वयन शब्दवीणा की राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो डॉ रश्मि प्रियदर्शनी ने किया। कुशल संचालन हरियाणा से जुड़ीं शब्दवीणा सृजन त्रिविधा प्रभारी कवयित्री कीर्ति यादव ने किया। श्रीमती कीर्ति ने सभी रचनाकारों का संक्षिप्त परिचय देते हुए शब्दवीणा के मंच पर वंदन-अभिनंदन किया।
सृजन त्रिविधा का शुभारंभ प्रो सुनील कुमार उपाध्याय द्वारा सुमधुर स्वर में प्रस्तुत गणेश वंदना "आईं आईं ए गणेश जी पधारीं अंगना। रउआ आईं ना अकेले वाणी लाईं संग ना" से हुआ। प्रो उपाध्याय ने कजरी, जिसके बोल थे, "बदरा से चुए रस बुनिआ, मुरारी बिना सून बा गली" सुनाकर मंच से खूब वाहवाहियाँ पायीं। सभ्य कहे जाने वाले मानव समाज में इक्कीसवीं सदी में भी बच्चियों, युवतियों, एवं महिलाओं के साथ हो रही क्रूरता एवंं दरिंदगी पर रचित उनके मर्मस्पर्शी गीत, "ये कैसी अब हवा चली है। हैवानों से भरी गली है। सदमे में मासूम कली है" ने श्रोताओं को भावविभोर कर डाला।
आशा दिनकर की "जन-जन आकुल आज धरा पर, सबके कष्ट मिटा जाओ | हे मोहना कृष्ण कन्हाई, नटवर नागर आ जाओ" को भी दर्शकों ने खूब सराहा। श्रीमती दिनकर की गज़ल "जवां थी महफ़िल, पर नजर उन्हीं पर। गुनगुनाई थी गज़ल, पर असर उन्हीं पर", तथा सावन गीत "तन-मन हर्षित पुलक रहा है, चली पवन इस मास। विकल हो रहा आज जिया ये, आया है मधुमास" पर खूब तालियाँ बजीं। शेरघाटी, गया से शिक्षक एवं कवि अजय कुमार वैद्य ने "सूरज की किरणों से प्यारे, धरती जब भी तपती है। मेघ सभी अंगड़ाई लेते, वर्षा धरा पर होती है" कविता पढ़ी। उन्होंने "सृष्टि की रचना क्यों" एवं "सबसे बड़ा दानी" रचनाएँ सुनायीं। कीर्ति यादव ने "मैं थक कर आया शरण तेरी, मेरे प्रभु अब तो दया कर दो" भजन सुनाकर काव्यगोष्ठी को भक्ति भाव से भर दिया।
कार्यक्रम का सीधा प्रसारण शब्दवीणा केन्द्रीय पेज से किया गया, जिससे जुड़कर जैनेन्द्र कुमार मालवीय, महावीर सिंह वीर, डॉ विजय शंकर, डॉ वीरेंद्र कुमार, प्यारचन्द कुमार मोहन, सुरेश विद्यार्थी, बबन बदिया, अरुण अपेक्षित, ललित शंकर, पंकज मिश्र, डॉ रवि प्रकाश, आर के निगम, फतेहपाल सिंह सारंग, संतोष कुमार जयंत, सुरेश गुप्ता, सुप्रिया आयुष, सौरभ कुमार मिश्र सहित देश भर के साहित्यानुरागियों ने कार्यक्रम का आनंद लिया तथा अपनी टिप्पणियों से आमंत्रित रचनाकारों का उत्साह बढ़ाया। राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ रश्मि प्रियदर्शनी ने बतलाया कि शब्दवीणा द्वारा नये रचनाकारों एवं कलाकारों के लिए 'शब्दवीणा सृजन त्रिविधा', 'एक शाम साहित्य के नाम', 'शब्दवीणा संगीत संध्या' एवं शब्दवीणा भेंटवार्ता 'सत्यम् शिवम् सुंदरम्' जैसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं। इन सभी कार्यक्रमों को दर्शकों एवं श्रोताओं से खूब सराहना मिल रही है।