भारत और रुस मिलकर बनाएंगे एडवांस ड्रोन और सैटेलाइट, कानपुर बनेगा हब, युवाओं को मिलेगी वर्ल्ड क्लास स्किल
इस लैब में विशेष सर्टिफिकेशन कोर्स शुरू किए जाएंगे, जहां छात्र ड्रोन डिजाइनिंग, सॉफ्टवेयर ऑपरेशन और फ्लाइट कंट्रोल जैसी स्किल्स सीखेंगे। इसका फोकस इंडस्ट्री-रेडी प्रोफेशनल तैयार करना है।
NEW DELHI : भारत और रुस के बीच दोस्ती अब सिर्फ रक्षा सौदों तक सीमित नहीं रही बल्कि अब यह साझेदारी भविष्य की टेक्नोलॉजी को लेकर एक नए स्तर पर पहुंच चुकी है। दोनों देश मिलकर ड्रोन और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी में युवाओं को तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहे हैं। इस नई पहल का मकसद भारत के छात्रों को अत्याधुनिक तकनीक में प्रशिक्षित करना है ताकि वे देश में ही एडवांस ड्रोन और सैटेलाइट सिस्टम विकसित कर सकें। यह पहल तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत के लिए एक अहम मील का पत्थर मानी जा रही है।
इस प्रोजेक्ट का सबसे अहम केंद्र कानपुर बनने जा रहा है। कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कैंपस में एक बिल्कुल नई और हाई-टेक यूएवी (ड्रोन) लैब स्थापित की जाएगी। इस लैब का फोकस सिर्फ थ्योरी पढ़ाने पर नहीं होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक यहां ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक से जुड़े खास सर्टिफिकेशन कोर्स शुरू किए जा रहे हैं। इसका मतलब यह है कि छात्र क्लासरूम में बैठकर सिर्फ किताबों का रट्टा नहीं मारेंगे बल्कि वे असली पुर्जों के साथ काम करेंगे। वे सीखेंगे कि एक ड्रोन कैसे डिजाइन होता है, उसके सॉफ्टवेयर कैसे काम करते हैं और उसे आसमान में कैसे कंट्रोल किया जाता है।
इस पूरे प्रोजेक्ट में जो सबसे दिलचस्प बात है, वह है रूस की सीधी एंट्री। छात्रों को ट्रेनिंग देने और तकनीक सिखाने के लिए मॉस्को का मशहूर ‘इनोप्राक्टिका टेक्नोलॉजी हब’ भारतीय कॉलेजों के साथ मिलकर काम कर रहा है।
इनोप्राक्टिका को रूस में तकनीक और इनोवेशन का पावरहाउस माना जाता है। अब वहां के वैज्ञानिक और एक्सपर्ट भारतीय युवाओं को बताएंगे कि ड्रोन और सैटेलाइट की दुनिया में नया क्या चल रहा है। यह भारतीय छात्रों के लिए एक लॉटरी लगने जैसा है क्योंकि उन्हें दुनिया की सबसे बेहतरीन एयरोस्पेस तकनीक सीधे उन रूसी गुरुओं से सीखने को मिलेगी, जो इस फील्ड के दिग्गज माने जाते हैं।
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