एसीबी की जांच में खुलासा, *हिंडाल्को को सीटीओ की अवधि विस्तार देकर डीएमओ ने किया पद का दुरूपयोग

  हिंडाल्को को अनुचित लाभ पहुंचाने का भी किया प्रयास

Jun 10, 2026 - 15:03
एसीबी की जांच में खुलासा, *हिंडाल्को को सीटीओ की अवधि विस्तार देकर डीएमओ ने किया पद का दुरूपयोग

रांची : भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ( एसीबी ) की जांच में यह खुलासा हुआ कि डीएमओ महेंद्र प्रसाद ने मेसर्स हिंडाल्को प्राइवेट लिमिटेड को सीटीओ देने में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए घोटाला किया। महेंद्र प्रसाद तब सहायक खनन पदाधिकारी, लोहरदगा के पद पर पदस्थापित थे। लेकिन वर्तमान में यह सिमडेगा में जिला खनन पदाधिकारी के पद पर पदस्थापित हैं। एसीबी की जांच में आए तथ्यों के अनुसार मामले को लेकर एक शिकायत के आधार पर वर्ष 2020 में पीइ दर्ज किया गया था। जिसके बाद मामले में एसीबी ने गहराई से जांच-पड.ताल शुरू की थी। एसीबी ने जांच के दौरान पाया कि झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के द्वारा हिंडाल्को को जारी कंसेंट टू ऑपरेट (सीटीओ) की वैद्यता 18 जून 2026 तक थी। कंपनी की ओर से इसकी अवधि विस्तार के लिए आवेदन दिया गया था, लेकिन मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड  द्वारा कोई निर्णय नहीं लिया गया था। इसके बावजूद महेंद्र प्रसाद ने अपने स्तर से सीटीओ को तीन माह के लिए बढ़ा दिया औार बाद में निदेशक खनन से अनुमोदन मांगते हुए लेटर लिखा था।

**सहायक खनन पदाधिकारी को नहीं था सीटीओ देने का अधिकार 


एसीबी को जांच के दौरान इस बात के तथ्य मिले हैं कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के किसी भी निर्देश या लेटर में सहायक खनन पदाधिकारी को सीटीओ जारी करने या उसकी अवधि बढ़ाने का अधिकार नहीं दिया गया था। इस संबंध में तत्कालीन निदेशक खनन ने महेंद्र प्रसाद को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था। एसीबी को जांच के दौरान इस बात पर संदेह है कि आरोपी ने अपने पद दुरूपयोग कर हिंडाल्को को लाभ पहुंचाने के लिए ऐसा किया। एसीबी को जांच के दौरान यह भी पता चला है कि महेंद्र प्रसाद ने अपने अधिकार का गलत उपयोग कर सीटीओ की अवधि बढ़ाने के बाद पोस्ट फैकटो अनुमति लेने का प्रयास किया। मामले में आरोपी संलिप्तता पर और ठोस साक्ष्य जुटाने के लिए आगे एसीबी की जांच जारी है।

जानकारी के अनुसार सिमडेगा डीएमओ से पूछताछ कर सकती है। एसीबी की टीम
आरंभिक जांच में संलिप्तता से संबंधित तथ्य मिलने के बाद एसीबी के इंस्पेक्टर अमरेश कुमार की शिकायत पर वर्ष 2025 में किया गया था। केस दर्ज करने के लिए सरकार से अनुमति भी ली गयी थी। एसीबी के अधिकारी इस मामले में आगे अब महेंद्र प्रसाद से पूछताछ भी कर सकते हैं।

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