बिहार में चक्रवात अर्णब का कहर, खेतों में बिछी धान की फसल; उत्पादन में 20% तक गिरावट की आशंका, किसानों पर दोहरी मार
बिहार में चक्रवात अर्णब के प्रभाव से तेज हवा और बेमौसम बारिश ने धान, केला और सब्जियों की फसलों को नुकसान पहुंचाया है। कृषि वैज्ञानिकों के शुरुआती आकलन में धान उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक गिरावट की आशंका है। रबी फसलों की बुवाई पर भी असर पड़ सकता है।
पटना: बिहार में चक्रवात अर्णब का असर अब किसानों की मुश्किलें बढ़ाने लगा है। लगातार दूसरे दिन तेज हवाओं और बेमौसम बारिश ने राज्य के कई इलाकों में खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। सबसे ज्यादा प्रभावित धान की खेती हुई है। फसल पककर तैयार होने के समय आई इस प्राकृतिक आपदा ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। इसके अलावा केला और सब्जियों की खेती को भी नुकसान पहुंचने की खबर है। कृषि वैज्ञानिकों के प्रारंभिक आकलन के मुताबिक, इस बार राज्य में धान के उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक गिरावट आने की आशंका जताई जा रही है।
पिछले 48 घंटों से जारी बारिश और तेज हवाओं के कारण खेतों में तैयार धान की फसल जमीन पर गिर गई है। कई जगहों पर धान की बालियां पानी और कीचड़ के संपर्क में आ गई हैं। इससे फसल की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ दानों के खराब होने और अंकुरित होने का खतरा भी बढ़ गया है। जिन किसानों ने धान की कटाई की तैयारी शुरू कर दी थी, उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
पककर तैयार धान की फसल पर मौसम की मार
धान की खेती के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान खेतों में फसल पककर कटाई के लिए तैयार होती है। ऐसे में तेज हवा और बारिश से पौधों के गिरने पर किसानों को दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ खेतों में गिरी फसल की कटाई मुश्किल हो गई है, वहीं दूसरी तरफ लगातार नमी के कारण धान की गुणवत्ता खराब होने की आशंका है।
विशेषज्ञों के अनुसार, खेतों में गिरी हुई फसल को समय पर नहीं संभाला गया तो दानों में नमी बढ़ सकती है। इससे फसल के भंडारण और बाजार में बिक्री के दौरान भी किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। धान उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक संभावित गिरावट का अनुमान किसानों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
केला और सब्जियों की खेती को भी नुकसान
चक्रवात अर्णब का असर सिर्फ धान की फसल तक सीमित नहीं है। तेज हवाओं के कारण कई इलाकों में केले के पौधों के गिरने और टूटने की आशंका है। वहीं, खेतों में लगी सब्जियों की फसल भी बारिश और जलजमाव से प्रभावित हुई है।
सब्जियों की खेती करने वाले किसानों के सामने अब फसल बचाने की चुनौती है। खेतों में पानी जमा रहने से पौधों की जड़ें खराब हो सकती हैं। टमाटर, मिर्च और अन्य मौसमी सब्जियों की खेती पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है। यदि मौसम लंबे समय तक खराब रहा तो किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ बाजार में सब्जियों की आवक प्रभावित होने की स्थिति भी बन सकती है।
किसानों पर मौसम की दोहरी मार
इस साल बिहार के किसानों को मौसम की लगातार अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ा है। मानसून के दौरान कई क्षेत्रों में बारिश की कमी के कारण धान की रोपनी और फसल की बढ़वार प्रभावित हुई थी। इसके बाद कुछ इलाकों में नदियों के जलस्तर में वृद्धि और बाढ़ के कारण खेतों एवं फसलों को नुकसान पहुंचा।
किसानों ने तमाम मुश्किलों के बावजूद फसल को तैयार किया था, लेकिन कटाई के ठीक पहले चक्रवात अर्णब के कारण हुई बेमौसम बारिश ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। खेती में बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी पर खर्च करने वाले किसानों के सामने अब लागत निकालने की चुनौती खड़ी हो गई है।
रबी फसलों की बुवाई भी हो सकती है प्रभावित
बेमौसम बारिश का असर आगामी रबी सीजन पर भी पड़ने की आशंका है। खेतों में अत्यधिक नमी और जलजमाव के कारण गेहूं, चना, मसूर, मटर और सरसों जैसी फसलों की बुवाई में देरी हो सकती है।
रबी फसलों की बुवाई के लिए खेतों का समय पर तैयार होना जरूरी है। यदि बारिश के कारण खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहा तो किसानों को खेत सूखने का इंतजार करना पड़ेगा। इससे कृषि कैलेंडर प्रभावित हो सकता है और समय पर बुवाई नहीं होने की स्थिति में उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
शनिवार शाम से मौसम में सुधार के आसार
मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, शनिवार सुबह तक उत्तर बिहार के कई इलाकों में बारिश की संभावना बनी रह सकती है। शनिवार दोपहर से दक्षिण बिहार में बारिश थमने के आसार हैं, जबकि उत्तर बिहार में देर शाम तक मौसम में सुधार होने की उम्मीद है।
रविवार को राज्य के कई हिस्सों में धूप निकलने और अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी होने का अनुमान है। मौसम साफ होने से किसानों को खेतों से पानी निकालने और गिरी हुई फसल को संभालने में मदद मिल सकती है।
किसानों को अब राहत और मुआवजे का इंतजार
चक्रवात अर्णब के कारण फसलों को हुए नुकसान ने बिहार के किसानों की आर्थिक चिंता बढ़ा दी है। अब किसानों की नजर मौसम में सुधार के साथ-साथ फसल क्षति के आकलन पर भी है। प्रभावित किसानों को उम्मीद है कि प्रशासन खेतों का सर्वे कराकर वास्तविक नुकसान का आकलन करेगा और पात्र किसानों को सरकारी प्रावधानों के तहत राहत उपलब्ध कराई जाएगी।
कुल मिलाकर, फसल कटाई के समय आई बेमौसम बारिश ने बिहार के कृषि क्षेत्र के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। यदि मौसम का असर लंबे समय तक बना रहता है तो इसका प्रभाव न केवल धान उत्पादन बल्कि किसानों की आमदनी और आगामी रबी सीजन पर भी पड़ सकता है।
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