हजारीबाग में कल्पतरु को लेकर जागरूकता अभियान, आस्था के साथ पर्यावरण और आयुर्वेदिक महत्व पर जोर
हजारीबाग में डॉ. मनोज कुमार ने कल्पतरु के पौराणिक, पर्यावरणीय और औषधीय महत्व की जानकारी साझा की। ‘मेरी धरती मेरी जिम्मेवारी’ अभियान के तहत हजारीबाग में 125 से अधिक कल्पतरु के पौधे लगाए जा चुके हैं। उन्होंने लोगों से प्रकृति संरक्षण और अधिक से अधिक वृक्षारोपण की अपील की।
हजारीबाग। प्रकृति, संस्कृति और आस्था के संगम के प्रतीक माने जाने वाले कल्पतरु (कल्पवृक्ष) को लेकर डॉ. मनोज कुमार ने लोगों को इसके पौराणिक, पर्यावरणीय और औषधीय महत्व की जानकारी दी।
डॉ. मनोज कुमार के अनुसार, पौराणिक मान्यताओं में कल्पतरु का विशेष महत्व बताया गया है। इसे समुद्र मंथन से प्राप्त दिव्य वृक्षों में शामिल माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कल्पतरु को मनोकामना पूर्ण करने वाला वृक्ष भी कहा जाता है।
उन्होंने बताया कि कल्पतरु का महत्व केवल धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति संरक्षण के दृष्टिकोण से भी ऐसे वृक्षों और पारंपरिक वृक्षारोपण की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पेड़ लगाने और पर्यावरण संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी बनाने की अपील की।
डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि उनके समूह ‘मेरी धरती मेरी जिम्मेवारी’ के माध्यम से हजारीबाग में वृक्षारोपण अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत संबंधित परिसर में 30 से अधिक तथा नगर क्षेत्र में अब तक 125 से अधिक कल्पतरु के पौधे लगाए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में प्रकृति संरक्षण को आस्था और धार्मिक मान्यताओं से जोड़कर लोगों के जीवन का हिस्सा बनाया गया था। आज जरूरत है कि उसी भावना को आगे बढ़ाते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएं।
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