PGT नियुक्ति घोटाला : मुख्यमंत्री ने जिस मूक-बधिर को नियुक्ति पत्र दिया, वह बोल और सुन सकता है ।
रांची के प्रभात तारा मैदान में खुद झारखंड के मुखिया हेमंत सोरेन ने शिक्षकों को अपने हाथों से नियुक्ति पत्र बाँटा।

जब से झारखंड बना है तब से शायद ही कोई ऐसी बहाली हो जिसमें की घोटाला या भ्रष्टाचार की बात नहीं सामने आई हो। अभी अभी ताजा मामला जेएसएससी की तरफ से लिए गए PGT शिक्षक बहाली का है। इस बहाली में कई तरह के खेल हुए हैं और ऐसा भी नहीं है कि प्रशासन को इस बात की भनक नहीं है। बिना अधिकारियों के मिलीभगत के यह घोटाला संभव नहीं है। लेकिन प्रशासन को जानकारी होने के बावजूद भी PGT शिक्षक बहाली के घोटाले में कार्रवाई तो दूर बल्कि शिक्षकों को नियुक्ति पत्र देने के मामले में इसे एक बड़े समारोह का रूप दे दिया गया। रांची के प्रभात तारा मैदान में खुद झारखंड के मुखिया हेमंत सोरेन ने शिक्षकों को अपने हाथों से नियुक्ति पत्र बाँटा। लेकिन किसी भी प्रशासनिक अधिकारी ने हेमंत सोरेन को यह बताने की जरूरत नहीं समझी कि जिस मूक-बधिर को वह नियुक्ति पत्र सौंप रहे हैं वह बोल भी सकता है और सुन भी सकता है।
जानिए पूरे मामले को
जिस योगेंद्र कुमार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने हाथों से नियुक्ति पत्र दिया है उसके पिता का नाम सुरेंद्र प्रसाद यादव है और उसके सर्टिफिकेट में देवघर का पता लिखा हुआ है। योगेंद्र कुमार का रोल नंबर है 10408087। इसकी नियुक्ति मूक-बधिर आरक्षण श्रेणी के तहत हुई है। लेकिन आश्चर्य की बात है कि यह सुन भी सकता है और बोल भी सकता है। ऐसे कई ऑडियो रिकॉर्ड सोशल मीडिया पर मिल जाएंगे जिसमें योगेंद्र को बात करते हुए सुना जा सकता है। योगेन्द्र कुमार झारखंड सरकार की नौकरी बहाली में एक ऐसे वर्ग के आरक्षण का लाभ लेता है जिसके वह काबिल ही नहीं है। अब ऐसे में सवाल उठता है कि कैसे JSSC ने योगेंद्र की बहाली कर ली? क्या JSSC की बहाली प्रक्रिया फर्जी तरीके से हुई है? कई तरह के सवाल उठे हैं इस बहाली प्रक्रिया में और भी कई तरह के घोटाले हुए हैं जिसका खुलासा होना बाकी है।