CBI का कई राज्यों में छापा, ऑनलाइन ठगी के बड़े गिरोह पर कसा शिकंजा, 900 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप

यह मामला ऑनलाइन निवेश और पार्ट-टाइम नौकरी के नाम पर लोगों को ठगने वाले एक संगठित साइबर गिरोह से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि यह नेटवर्क एक विदेशी वित्तीय प्रौद्योगिकी मंच के जरिए संचालित किया जा रहा था, जिसके माध्यम से ठगी की रकम को जटिल ऑनलाइन लेन-देन और धन निकासी प्रणाली के जरिए विदेशों तक पहुंचाया जाता था।

Mar 12, 2026 - 17:11
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CBI का कई राज्यों में छापा, ऑनलाइन ठगी के बड़े गिरोह पर कसा शिकंजा, 900 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप

NEW DELHI : ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में सीबीआई (CBI) ने देश के कई राज्यों में व्यापक छापेमारी की है। जांच एजेंसी ने दिल्ली, यूपी, राजस्थान और पंजाब समेत कुल 15 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया।

जांच के मुताबिक यह मामला ऑनलाइन निवेश और पार्ट-टाइम नौकरी के नाम पर लोगों को ठगने वाले एक संगठित साइबर गिरोह से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि यह नेटवर्क एक विदेशी वित्तीय प्रौद्योगिकी मंच के जरिए संचालित किया जा रहा था, जिसके माध्यम से ठगी की रकम को जटिल ऑनलाइन लेन-देन और धन निकासी प्रणाली के जरिए विदेशों तक पहुंचाया जाता था।

इस मामले में गिरोह का कथित सरगना अशोक कुमार शर्मा को पहले ही ईडी (ED) द्वारा गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोप है कि चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक कुमार शर्मा दिल्ली-गुरुग्राम सीमा के पास स्थित बिजवासन इलाके में अपने कार्यालय से पूरे नेटवर्क का संचालन करता था। जांच एजेंसियों के बीच यह नेटवर्क अनौपचारिक रूप से “बिजवासन ग्रुप” के नाम से जाना जाने लगा था।

900 करोड़ रुपये की ठगी का आरोप

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने पिछले साल ही करीब 900 करोड़ रुपये की ठगी की। ठगी से हासिल रकम को छिपाने और वैध दिखाने के लिए लगभग 15 शेल कंपनियों का नेटवर्क तैयार किया गया था। इन कंपनियों के जरिए पैसे को अलग-अलग बैंक खातों और विदेशी प्लेटफार्मों के माध्यम से घुमाया जाता था।

सोशल मीडिया और ऐप के जरिए फंसाए जाते थे लोग

जांच एजेंसियों के अनुसार यह गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, मोबाइल ऐप और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सेवाओं का इस्तेमाल कर लोगों को अपने जाल में फंसाता था। लोगों को ऑनलाइन निवेश पर भारी मुनाफा और घर बैठे पार्ट-टाइम नौकरी का लालच दिया जाता था, जिसके चलते कई लोग इस ठगी का शिकार हो गए।

यह मामला इंडियन साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर द्वारा CBI को सौंपा गया था। इसके बाद एजेंसी ने केस दर्ज कर जांच शुरू की और अलग-अलग राज्यों में एक साथ छापेमारी की कार्रवाई की।

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