भारत की साइलेंट डिप्लोमेसी, जयशंकर-अरागची के बीच 3 फोन कॉल, सुलझा भारतीय जहाजों की सुरक्षा का मसला, तेल संकट की टेंशन भी खत्म!
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस कूटनीतिक संपर्क की पुष्टि करते हुए कहा कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए ईरान के साथ लगातार संवाद कर रहा है।
NEWS DESK : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने एक बार फिर अपनी कूटनीतिक रणनीति से अहम संदेश दिया है। हाल के दिनों में विदेश मंत्र एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अरागची के बीच हुई लगातार तीन फोन वार्ताओं ने भारत की दो बड़ी चिंताओं समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर सकारात्मक माहौल बनाया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस कूटनीतिक संपर्क की पुष्टि करते हुए कहा कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए ईरान के साथ लगातार संवाद कर रहा है।
समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति पर फोकस
लाल सागर और फारस की खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने वैश्विक समुद्री व्यापार को प्रभावित किया है। ऐसे में भारतीय मालवाहक जहाजों की सुरक्षा भारत के लिए बड़ी चिंता बन गई थी। दोनों विदेश मंत्रियों के बीच हुई बातचीत में इसी मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। इस संवाद के बाद भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। इसके साथ ही ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर भी भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच ईरान के साथ यह समन्वय भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, ईरान में करीब 9,000 भारतीय नागरिक मौजूद हैं, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल हैं। युद्ध जैसे हालात को देखते हुए भारत सरकार ने ‘ऑपरेशन कवच’ के तहत अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की तैयारी की है।
सरकार की एडवाइजरी के बाद कई भारतीय स्वदेश लौट चुके हैं, जबकि जो लोग अभी भी वहां हैं उन्हें सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है। जरूरत पड़ने पर उन्हें निकालने के लिए आर्मेनिया और अजरबैजान के वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
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