मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना में सुस्ती पर सम्राट सरकार सख्त, पूरे बिहार से मांगी रिपोर्ट; अधूरी योजनाओं की होगी गहन समीक्षा
पटना: मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के क्रियान्वयन में लगातार हो रही देरी को लेकर बिहार सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। कई विकास योजनाओं के वर्षों से अधूरे रहने की शिकायतों के बाद योजना एवं विकास विभाग ने पूरे बिहार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। सरकार अब स्वीकृत योजनाओं की प्रगति, खर्च की स्थिति और लंबित कार्यों की गहन समीक्षा करेगी।
पटना: मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के क्रियान्वयन में लगातार हो रही देरी को लेकर बिहार सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। कई विकास योजनाओं के वर्षों से अधूरे रहने की शिकायतों के बाद योजना एवं विकास विभाग ने पूरे बिहार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। सरकार अब स्वीकृत योजनाओं की प्रगति, खर्च की स्थिति और लंबित कार्यों की गहन समीक्षा करेगी।
विभाग की ओर से जिलों और संबंधित अधिकारियों से स्वीकृत योजनाओं की मौजूदा स्थिति, अब तक हुए खर्च और कार्यों के पूरा नहीं होने के कारणों की जानकारी मांगी गई है। सरकार का उद्देश्य लंबित योजनाओं को जल्द पूरा कराना और विकास मद में उपलब्ध राशि का प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करना है।
2021-22 से 2025-26 तक की योजनाओं की होगी समीक्षा
विभाग के अनुसार, 17वीं विधानसभा के कार्यकाल यानी वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान विधायकों और विधान पार्षदों की अनुशंसा पर मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत कई विकास कार्यों को मंजूरी दी गई।
जनवरी 2026 तक इन स्वीकृत योजनाओं के लिए उपलब्ध राशि में से करीब 71.40 फीसदी राशि खर्च की जा चुकी थी। वहीं करीब 20 फीसदी स्वीकृत योजनाएं अभी भी अलग-अलग चरणों में क्रियान्वयन के दौर में हैं।
सरकार अब यह देखेगी कि किन योजनाओं में काम शुरू हो चुका है, किन योजनाओं में काम पूरा हो गया है और किन योजनाओं में स्वीकृति मिलने के बावजूद काम लंबित है।
आठ साल पुरानी योजनाएं भी अधूरी
सरकार की चिंता इस बात को लेकर भी बढ़ी है कि राज्य के कई क्षेत्रों में आठ साल पहले स्वीकृत योजनाओं का काम अब तक पूरा नहीं हुआ है। ऐसी योजनाओं की विभागीय स्तर पर अलग से जानकारी जुटाई जा रही है।
रिपोर्ट में योजना की स्वीकृति की तारीख, कार्य की वर्तमान स्थिति, खर्च की गई राशि, शेष राशि और काम में देरी के कारणों की जानकारी लिए जाने की संभावना है। इसके आधार पर लंबित योजनाओं को पूरा कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
CAG रिपोर्ट में भी सामने आई थीं कमियां
मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के क्रियान्वयन को लेकर इससे पहले मार्च 2023 की CAG रिपोर्ट में भी कई कमियां सामने आई थीं। रिपोर्ट में नमूना जांच के दौरान 13 प्रमंडलों में उपलब्ध निधि के 28 से 59 फीसदी तक राशि का उपयोग नहीं होने की बात सामने आई थी।
इसके कारण बड़ी राशि पर्सनल लेजर अकाउंट (PLA) में अव्यवहृत पड़ी रही। अब सरकार की कोशिश है कि विकास योजनाओं के लिए उपलब्ध राशि लंबे समय तक बिना इस्तेमाल के न पड़ी रहे और स्वीकृत कार्यों को निर्धारित समय के भीतर पूरा कराया जाए।
कई प्रमुख शहरों में चलती हैं विकास योजनाएं
मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत बिहार के कई प्रमुख शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, नाली, सामुदायिक भवन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य जनोपयोगी विकास कार्य कराए जाते हैं।
इस योजना के तहत पटना, गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, भागलपुर, पूर्णिया, छपरा, सीवान, सासाराम, बेतिया और सीतामढ़ी समेत कई प्रमुख क्षेत्रों में विकास कार्य कराए जा रहे हैं।
सरकार का अब मुख्य जोर स्वीकृत योजनाओं को समय पर पूरा कराने, लंबित परियोजनाओं की वजह पता करने और आवंटित राशि का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने पर है। पूरे राज्य से रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार लंबित योजनाओं को लेकर आगे की कार्रवाई तय करेगी।
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