पटना हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, सुरक्षा व्यवस्था के दावे पर उठे सवाल; 63.76 किलो गांजा मामले में SSP को जांच का आदेश

पटना: असम के गुवाहाटी से बिहार के पटना तक 63.76 किलोग्राम गांजा लदी महिंद्रा TUV गाड़ी के पहुंचने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि बिना वैध दस्तावेज और ड्राइविंग लाइसेंस के इतनी लंबी दूरी तक वाहन अंतरराज्यीय सीमाएं पार कर सकता है, तो सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

Sep 21, 2026 - 11:33
पटना हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, सुरक्षा व्यवस्था के दावे पर उठे सवाल; 63.76 किलो गांजा मामले में SSP को जांच का आदेश

पटना: असम के गुवाहाटी से बिहार के पटना तक 63.76 किलोग्राम गांजा लदी महिंद्रा TUV गाड़ी के पहुंचने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि बिना वैध दस्तावेज और ड्राइविंग लाइसेंस के इतनी लंबी दूरी तक वाहन अंतरराज्यीय सीमाएं पार कर सकता है, तो सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

जस्टिस अरुण कुमार झा की एकल पीठ ने दो आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान मामले की जांच में सामने आए तथ्यों पर चिंता जताई। कोर्ट ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि गुवाहाटी से पटना तक रास्ते में कई पुलिस थाने, सीमा जांच चौकियां और चेकिंग प्वाइंट होने के बावजूद गांजा लदा वाहन बिना किसी प्रभावी रोक-टोक के दीदारगंज तक कैसे पहुंच गया।

उम्र को लेकर भी बड़ा सवाल

मामले में डीआरआई ने गिरफ्तारी के समय आरोपियों की उम्र क्रमशः 25 और 21 वर्ष दर्ज की थी। बाद में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड की जांच में दोनों की उम्र 15 वर्ष 9 महीने और 16 वर्ष पाई गई। उम्र को लेकर सामने आए इस विरोधाभास पर हाईकोर्ट ने भी सवाल उठाए।

याचिकाकर्ताओं की ओर से यह दावा किया गया कि उन्होंने कभी स्कूल में पढ़ाई नहीं की। कोर्ट ने इस दावे पर भी संदेह जताते हुए उम्र और शैक्षणिक रिकॉर्ड की स्वतंत्र रूप से जांच कराने की जरूरत बताई।

SSP पटना को 3 महीने में रिपोर्ट देने का निर्देश

हाईकोर्ट ने पटना के SSP को पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर तीन महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। जांच में गुवाहाटी से पटना तक रास्ते में हुई सुरक्षा जांच और चेकिंग की स्थिति की भी पड़ताल की जाएगी।

इसके अलावा यह भी जांचने को कहा गया है कि दोनों आरोपी वास्तव में नाबालिग हैं या नहीं और क्या उन्होंने कभी किसी स्कूल में पढ़ाई नहीं की थी। यदि जांच में उम्र छिपाने या किसी तरह के फर्जीवाड़े की पुष्टि होती है, तो डीआरआई और राज्य सरकार को जमानत रद्द कराने के लिए कानूनी कदम उठाने की स्वतंत्रता होगी।

बाल न्याय अधिनियम के तहत मिली जमानत

हाईकोर्ट ने बाल न्याय (देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चों के मामले में जमानत सामान्य नियम है और केवल अपराध की गंभीरता के आधार पर जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने निचली अदालत और जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के आदेशों को निरस्त करते हुए दोनों को 10-10 हजार रुपये के मुचलके और परिजनों की गवाही की शर्त पर जमानत देने का निर्देश दिया।

इस मामले में हाईकोर्ट की टिप्पणी और जांच के आदेश के बाद अब पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था, चेकिंग प्रक्रिया और दोनों आरोपियों की उम्र से जुड़े दस्तावेजों की जांच पर नजर रहेगी।

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