पति के पर्सनल लोन की वसूली के लिए विधवा के खाते से ₹17.30 लाख काटना गलत, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने SBI को रिफंड का दिया आदेश
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पति के पर्सनल लोन की वसूली के लिए विधवा के बैंक खाते से ₹17.30 लाख की रकम काटे जाने के मामले में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को राशि वापस करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इस तरह की कटौती को गलत माना है।
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पति के पर्सनल लोन की वसूली के लिए विधवा के बैंक खाते से ₹17.30 लाख की रकम काटे जाने के मामले में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को राशि वापस करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इस तरह की कटौती को गलत माना है।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि बैंक किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत ऋण की वसूली के लिए उसकी पत्नी के खाते में जमा रकम पर इस तरह दावा नहीं कर सकता, खासकर जब खाता पत्नी के नाम पर हो और वह ऋण की उधारकर्ता या गारंटर न हो।
याचिका में महिला ने आरोप लगाया था कि उनके पति द्वारा लिए गए पर्सनल लोन की बकाया राशि की वसूली के नाम पर SBI ने उनके बैंक खाते से कुल ₹17.30 लाख की रकम काट ली। महिला के अनुसार, पति की मृत्यु के बाद भी बैंक ने उनके खाते से रकम की कटौती की।
मामले पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने बैंक की कार्रवाई पर सवाल उठाया और महिला के खाते से काटी गई राशि वापस करने का निर्देश दिया। कोर्ट के आदेश के बाद अब SBI को ₹17.30 लाख की रकम रिफंड करनी होगी।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के ऋण की जिम्मेदारी स्वतः उसके परिवार के दूसरे सदस्य पर नहीं डाली जा सकती। ऋण की वसूली के लिए संबंधित व्यक्ति की कानूनी देनदारी और बैंक के अधिकारों को अलग-अलग देखा जाना जरूरी है।
यह फैसला उन मामलों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जहां किसी मृतक के कर्ज की वसूली के लिए उसके परिवार के सदस्यों के व्यक्तिगत बैंक खातों से रकम काटने का सवाल उठता है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0







