हर पंचायत में मुक्तिधाम निर्माण की धीमी रफ्तार पर पटना हाईकोर्ट सख्त, बिहार सरकार से मांगा जवाब
पटना हाईकोर्ट ने बिहार की हर पंचायत में बनने वाले मुक्तिधामों के निर्माण में देरी पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने फंड जारी होने के बावजूद धीमी रफ्तार और तय मानकों का पालन नहीं होने पर विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। याचिका में आरोप है कि कई मुक्तिधामों में पानी, बिजली, शेड, बैठने और सड़क जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं हैं।
पटना: बिहार की हर पंचायत में प्रस्तावित मुक्तिधाम के निर्माण की धीमी रफ्तार पर पटना हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने सरकार को विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल कर निर्माण कार्य की मौजूदा स्थिति और देरी के कारणों को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।
चीफ जस्टिस वी. कामेश्वर राव और जस्टिस पार्थ सारथी की खंडपीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता अजय कुमार सिंह की ओर से दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। कोर्ट ने सरकार से जानना चाहा कि फंड जारी होने के बावजूद मुक्तिधामों के निर्माण की रफ्तार धीमी क्यों है और निर्धारित मानकों का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है।
आवेदक की ओर से अधिवक्ता अमित कुमार ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2013 में आवेदक ने सबसे पहले मानवाधिकार आयोग से इस मामले में पहल करने का अनुरोध किया था। आयोग के आदेश के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर वर्ष 2020 में पटना हाईकोर्ट में लोकहित याचिका दायर की गई।
याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि बिहार पंचायती राज अधिनियम में संशोधन के बाद प्रत्येक पंचायत में आधुनिक और सुसज्जित मुक्तिधाम के निर्माण के लिए सरकारी फंड आवंटित किया गया। इसके बावजूद कई जगहों पर निर्धारित नियमों और मानकों के अनुरूप निर्माण नहीं हो रहा है।
आरोप है कि कई मुक्तिधामों में शेड, पानी, बिजली और बैठने जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा प्रत्येक मुक्तिधाम को बारहमासी मुख्य सड़क से जोड़ने का प्रावधान है, लेकिन कई जगहों पर एप्रोच रोड तक नहीं बनाया गया है। इससे ग्रामीणों को शव ले जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कई मुक्तिधाम पूरी तरह उपयोगी नहीं हो पाए हैं। उन्होंने कहा कि सम्मानजनक अंतिम संस्कार हर व्यक्ति का अधिकार है और सरकार को योजना का प्रभावी तरीके से क्रियान्वयन सुनिश्चित करना चाहिए।
अब हाईकोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार को विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल कर निर्माण कार्य की स्थिति और देरी के कारणों की जानकारी देनी होगी।
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