कृषि बाजार शुल्क के मुद्दे पर कृषि मंत्री के साथ एफजेसीसीआई की वार्ता आयोजित
रांची। झारखण्ड विधानसभा में पारित झारखण्ड राज्य कृषि उपज विधेयक 2022 पर पुनर्विचार हेतु बुधवार को फेडरेशन ऑफ झारखण्ड चैंबर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष धीरज तनेजा के नेतृत्व में रांची चैंबर ऑफ कॉमर्स-पंडरा के पदाधिकारियों ने कृषि मंत्री बादल पत्रलेख से मुलाकात की। विधेयक को पारित करने से पूर्व राज्य सरकार द्वारा व्यवसायिक संगठनों से संवाद नहीं किये जाने पर चैंबर अध्यक्ष धीरज तनेजा ने चिंता जताई और कहा कि इस विधेयक के प्रभावी होने की सूचना से प्रदेश के प्रायः सभी जिलों के व्यापारियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि बाजार शुल्क समाप्त होने के बाद से राज्य में राईस मिलों की संख्या में भी काफी बढोत्तरी हुई है जो किसानों को समृद्ध करने और उनकी आय बढाने में सहायक साबित हुई हैं। यदि फिर से राज्य में कृषि उपज पर 2 प्रतिशत एवं 1 प्रतिशत बाजार शुल्क को प्रभावी किया जायेगा तब राज्य का प्रोडक्शन निकटवर्ती राज्यों की तुलना में महंगा हो जायेगा जो राज्य के उत्पादों की बिक्री को प्रभावित करेगा। चूंकि बाकी लागत जैसे ट्रांस्पोर्टेशन और उत्पादों का सेलिंग प्राइज फिक्स होता है, ऐसे में सस्ते दर पर धान की खरीदी करने से किसानों को नुकसान उठाना पडेगा। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि विधेयक के प्रावधान काफी अस्पष्ट और अव्यवहारिक हैं जिससे पुनः भ्रष्टाचार की स्थिति बनेगी। चूंकि कोविड की स्थिति अब सामान्य हो रही है इसलिए आर्थिक गतिविधियों को गति देने के उद्देश्य से इस विधेयक को तत्काल शिथिल किया जाय।
कृषि मंत्री ने इस बिंदु पर प्रतिनिधिमण्डल के साथ साकारात्मक चर्चा की। चैंबर अध्यक्ष के आग्रह पर उन्होंने इसपर उचित विचार के लिए आश्वस्त किया। प्रतिनिधिमण्डल में चैंबर अध्यक्ष धीरज तनेजा, कोषाध्यक्ष मनीष सर्राफ, रांची चैंबर-पंडरा के अध्यक्ष शंभू प्रसाद गुप्ता, संजय महुरी, सीताराम शर्मा एवं मनीष साहू सम्मिलित थे।



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