नेपाल की बाढ़ ने बढ़ाई भारत की चिंता, हिमालय की 200 खतरनाक झीलों पर नजर

नेपाल में ग्लेशियर से जुड़ी बाढ़ के बाद भारत में भी ग्लेशियल झीलों से संभावित खतरे को लेकर चिंता बढ़ी है। भारतीय हिमालयी क्षेत्र में करीब **7,500 ग्लेशियल झीलें** हैं, जिनमें लगभग **200 को हाई-रिस्क** माना गया है। प्राकृतिक बांध टूटने पर इनसे GLOF जैसी अचानक बाढ़ आ सकती है। सिक्किम, उत्तराखंड, हिमाचल, अरुणाचल और लद्दाख जैसे क्षेत्रों में निगरानी व शुरुआती चेतावनी प्रणाली मजबूत करना जरूरी है।

Aug 31, 2026 - 10:42
नेपाल की बाढ़ ने बढ़ाई भारत की चिंता, हिमालय की 200 खतरनाक झीलों पर नजर

नई दिल्ली:- नेपाल में ग्लेशियर से जुड़ी अचानक आई बाढ़ ने हिमालयी क्षेत्र में संभावित प्राकृतिक आपदाओं को लेकर चिंता बढ़ा दी है। नेपाल में हुई तबाही के बाद अब भारत में मौजूद ग्लेशियल झीलों की सुरक्षा और निगरानी पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। भारतीय हिमालयी क्षेत्र में करीब 200 ग्लेशियल झीलों को हाई-रिस्क श्रेणी में चिन्हित किया गया है।

इन झीलों में अचानक पानी का स्तर बढ़ने या प्राकृतिक बांध टूटने की स्थिति में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) आ सकती है। ऐसी बाढ़ बेहद कम समय में बड़ी मात्रा में पानी और मलबे को पहाड़ी इलाकों से नीचे की ओर बहा सकती है।

7,500 से ज्यादा ग्लेशियल झीलें, 200 पर ज्यादा खतरा

सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारतीय हिमालयी क्षेत्र में करीब 7,500 ग्लेशियल झीलें मौजूद हैं। इनमें लगभग 200 झीलों को ज्यादा जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है। ये झीलें मुख्य रूप से हिमालय के ऊंचाई वाले इलाकों में स्थित हैं।

सिक्किम, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख-जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों में ग्लेशियल झीलों की लगातार निगरानी जरूरी मानी जा रही है।

कैसे आती है ग्लेशियल झील से अचानक बाढ़?

ग्लेशियर के तेजी से पिघलने से उसके आसपास पानी जमा होकर झील का रूप ले सकता है। कई बार झील को रोकने वाला प्राकृतिक बांध कमजोर हो जाता है। भूस्खलन, बर्फ या चट्टानों के झील में गिरने से भी पानी का दबाव अचानक बढ़ सकता है।

अगर प्राकृतिक बांध टूट जाए तो झील का पानी बेहद तेज गति से नीचे की ओर बहता है। पानी के साथ चट्टानें और मलबा भी बहने लगता है, जिससे कुछ ही समय में बड़े इलाके में तबाही मच सकती है।

नेपाल की घटना से मिली बड़ी चेतावनी

नेपाल में हुई घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियल झीलों से पैदा होने वाले खतरे से निपटने की तैयारी कितनी मजबूत है। भारत में चिन्हित हाई-रिस्क झीलों की निगरानी, सैटेलाइट से लगातार निगरानी और शुरुआती चेतावनी प्रणाली को मजबूत करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, समय रहते खतरे की पहचान और स्थानीय लोगों तक अलर्ट पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत हो तो संभावित जान-माल के नुकसान को काफी कम किया जा सकता है। नेपाल की त्रासदी भारत समेत पूरे हिमालयी क्षेत्र के लिए एक गंभीर चेतावनी के तौर पर देखी जा रही है।

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