दीपावली से पहले कुम्हारों के बीच पहुंचे रांची DC, खुद खरीदे मिट्टी के दीये, स्थानीय कारीगरों को दिया प्रोत्साहन
रांची: दीपावली के पावन पर्व से पहले रांची जिला प्रशासन ने स्थानीय कुम्हारों और पारंपरिक कारीगरों को प्रोत्साहित करने के लिए एक सराहनीय पहल की है। रांची के अरसंडे स्थित बोडया रोड के जय प्रकाश नगर की कुम्हार बस्ती में जिला प्रशासन के अधिकारी पहुंचे और स्थानीय कारीगरों से मिट्टी के दीये खरीदे। इस दौरान रांची के उपायुक्त ने खुद दीयों की खरीदारी कर कुम्हार परिवारों का उत्साह बढ़ाया। प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक कुटीर उद्योग को बढ़ावा देना और स्थानीय कारीगरों को उनके मेहनत का उचित मूल्य दिलाना है।
रांची: दीपावली के पावन पर्व से पहले रांची जिला प्रशासन ने स्थानीय कुम्हारों और पारंपरिक कारीगरों को प्रोत्साहित करने के लिए एक सराहनीय पहल की है। रांची के अरसंडे स्थित बोडया रोड के जय प्रकाश नगर की कुम्हार बस्ती में जिला प्रशासन के अधिकारी पहुंचे और स्थानीय कारीगरों से मिट्टी के दीये खरीदे। इस दौरान रांची के उपायुक्त ने खुद दीयों की खरीदारी कर कुम्हार परिवारों का उत्साह बढ़ाया। प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक कुटीर उद्योग को बढ़ावा देना और स्थानीय कारीगरों को उनके मेहनत का उचित मूल्य दिलाना है।
कुम्हार परिवारों से जाना उनका हाल
कुम्हार बस्ती पहुंचकर उपायुक्त ने वहां रहने वाले कारीगर परिवारों से सीधे बातचीत की। उन्होंने दीये बनाने के काम, उनकी आमदनी, समस्याओं और जरूरतों के बारे में जानकारी ली। इस दौरान बताया गया कि मिट्टी के दीये तैयार करने में पूरे परिवार को कई दिनों तक मेहनत करनी पड़ती है। मिट्टी गूंथने से लेकर दीयों को आकार देने, सुखाने और रंग-रोगन करने तक की प्रक्रिया में काफी समय और श्रम लगता है। इसके बावजूद कारीगरों को उनकी मेहनत के अनुरूप आमदनी नहीं हो पाती है।
कारीगरों को मिलेगा सरकारी योजनाओं का लाभ
उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन मुख्यमंत्री लघु कुटीर बोर्ड के माध्यम से पारंपरिक कारीगरों को लगातार सहयोग उपलब्ध करा रहा है। इसके तहत इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, प्रशिक्षण और अन्य जरूरी सुविधाएं देने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आगे भी कुम्हार परिवारों को उनकी जरूरत के अनुसार मदद दी जाएगी।
इसके अलावा जिला इनोवेशन फंड के माध्यम से संरचना निर्माण, आवश्यक उपकरण और अन्य योजनागत सहायता उपलब्ध कराने की भी बात कही गई, ताकि कुम्हार परिवार बेहतर परिस्थितियों में अपने पारंपरिक व्यवसाय को आगे बढ़ा सकें।
लोगों से स्थानीय दीये खरीदने की अपील
उपायुक्त ने आम लोगों से अपील की कि दीपावली के अवसर पर स्थानीय कुम्हारों से मिट्टी के दीये जरूर खरीदें और उन्हें उचित कीमत दें। उन्होंने कहा कि दीये बनाने वाले परिवारों में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी लोग मेहनत करते हैं। ऐसे में उनके उत्पादों की खरीदारी करना उनके परिश्रम का सम्मान करने के साथ-साथ उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने का भी माध्यम है।
उन्होंने स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने और बाहरी उत्पादों पर निर्भरता कम करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। प्रशासन की कोशिश है कि स्थानीय बाजार और पारंपरिक हुनर को बढ़ावा मिले, जिससे कुम्हार समुदाय आत्मनिर्भर बन सके।
सड़क की समस्या पर लिया संज्ञान
दौरे के दौरान उपायुक्त ने एक महिला कारीगर से पेंशन मिलने की जानकारी भी ली। महिला ने बताया कि उन्हें पेंशन का लाभ मिल रहा है। वहीं, कुम्हार बस्ती में सड़क की खराब स्थिति की शिकायत सामने आने पर उपायुक्त ने संबंधित अधिकारी को तत्काल सड़क की मरम्मत कराने का निर्देश दिया, ताकि स्थानीय लोगों को आवागमन में परेशानी न हो।
बच्ची ने दिया मिट्टी का खिलौना, डिजिटल पेमेंट से किया भुगतान
दीयों की खरीदारी पूरी करने के बाद उपायुक्त ने डिजिटल माध्यम से भुगतान किया। इस दौरान एक छोटी बच्ची ने उन्हें मिट्टी से बना खिलौना उपहार स्वरूप दिया। बच्ची के इस स्नेह से उपायुक्त काफी प्रभावित हुए और उन्होंने बच्ची को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
इस मौके पर अनुमंडल पदाधिकारी सदर रांची कुमार रजत, अपर जिला दंडाधिकारी (विधि-व्यवस्था) धनंजय, जिला परिवहन पदाधिकारी अखिलेश कुमार, ट्रेनी आईएएस अधिकारी आस्था शरण, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी उर्वशी पांडेय और डीआरपी रांची आतेन विश्वासी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
जिला प्रशासन की इस पहल को स्थानीय कुम्हार समुदाय के लिए सकारात्मक कदम माना जा रहा है। इसका उद्देश्य सिर्फ दीपावली पर मिट्टी के दीयों की खरीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि पारंपरिक कारीगरी को संरक्षण देना, स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देना और कुम्हार परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना भी है।
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