बिहार में खून के अवैध कारोबार का शक, एक यूनिट से तीन यूनिट बनाने का आरोप; छापेमारी के बाद संचालक फरार
बिहार: बिहार में मिलावटी खून के कथित अवैध कारोबार का गंभीर मामला सामने आया है। पूर्वी चंपारण और पश्चिम चंपारण से जुड़े इस मामले में एक यूनिट रक्त में मिलावट कर तीन यूनिट बनाने और फर्जी लेबल लगाकर निजी नर्सिंग होम तक सप्लाई करने का आरोप है। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और औषधि विभाग में हड़कंप मच गया है।
बिहार: बिहार में मिलावटी खून के कथित अवैध कारोबार का गंभीर मामला सामने आया है। पूर्वी चंपारण और पश्चिम चंपारण से जुड़े इस मामले में एक यूनिट रक्त में मिलावट कर तीन यूनिट बनाने और फर्जी लेबल लगाकर निजी नर्सिंग होम तक सप्लाई करने का आरोप है। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और औषधि विभाग में हड़कंप मच गया है।
बेतिया में दो संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी
जानकारी के अनुसार, औषधि विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने पश्चिम चंपारण के बेतिया में दो संदिग्ध लैब परिसरों पर छापेमारी की। हालांकि, कार्रवाई के दौरान दोनों ठिकानों के संचालकों के फरार होने की बात सामने आई है। पुलिस उनकी तलाश में जुटी है। अधिकारियों को आशंका है कि इस अवैध कारोबार का नेटवर्क दूसरे इलाकों तक फैला हो सकता है। इसी के मद्देनजर मोतिहारी समेत अन्य स्थानों पर भी जांच का दायरा बढ़ाया जा सकता है।
एक यूनिट खून से तीन यूनिट बनाने का आरोप
आरोप है कि रक्त में आयरन सिरप और सामान्य सलाइन मिलाकर उसकी मात्रा बढ़ाई जाती थी। इसके बाद कथित तौर पर फर्जी ब्लड बैंक के लेबल लगाकर इसे निजी नर्सिंग होम में सप्लाई किया जाता था। यह भी आरोप है कि जरूरतमंद लोगों से कम कीमत पर रक्त लेकर उसे अधिक कीमत पर बेचा जाता था।
हालांकि, रक्त में मिलावट, फर्जी लेबल के इस्तेमाल और निजी नर्सिंग होम तक सप्लाई किए जाने से जुड़े इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
मरीजों की जान पर पड़ सकता है खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, बिना उचित जांच और निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं के रक्त चढ़ाना मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। दूषित रक्त से एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी जैसे गंभीर संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। रक्त की गुणवत्ता और सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता मरीजों की जान जोखिम में डाल सकता है।
जांच के बाद हो सकती है सख्त कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और नियमानुसार लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल, मामले से जुड़े आरोपों की पुष्टि और कथित नेटवर्क की पहचान करना जांच एजेंसियों के लिए अहम है।
स्वास्थ्य संबंधी अपील: मरीज और उनके परिजन रक्त चढ़ाने से पहले अधिकृत ब्लड बैंक और अस्पताल की व्यवस्था की पुष्टि करें। रक्त केवल पंजीकृत ब्लड बैंक से ही लें और उसकी जांच व सुरक्षा संबंधी जानकारी सुनिश्चित करें।
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