कोरोना का रोना और हव्वा कम करने की जरूरत

झारखंड की बात करें तो यहां अब तक 56,000 से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं। वहीं 42,000 से अधिक लोग स्वस्थ हो चुके हैं। जबकि 585 लोगों की मौत कोरोना की वजह से होने की बात कही जा रही है।

Sep 12, 2020 - 07:02
कोरोना का रोना और हव्वा कम करने की जरूरत

नवीन शर्मा
देश में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या 46,63930 पहुंच गई है। वहीं 77,537 लोगों की मौत कोरोना के संक्रमण के कारण बताई जा रही है। पिछले छह महीने से मीडिया में कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर हर दिन संक्रमितों के बढ़ते आंकड़ों को पहले पन्ने पर जरूरत से ज्यादा महत्व दिया जाता रहा है। इसके अलावा इस संक्रमण को रोकने या कहें कम तेजी से फैलने के लिए लगाए गए लंबे लॉकडाउन ने भी लोगों में कोरोना को लेकर बहुत अधिक भय का माहौल बना दिया है।

रिकवरी रेट 78 प्रतिशत है

दूसरी तरफ यह भी देखना चाहिए कि 36,24,375 लोगों कोरोना को मात देकर स्वस्थ हो चुके हैं। यानी रिकवरी रेट 78% है।
वहीं झारखंड की बात करें तो यहां अब तक 56,000 से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं। वहीं 42,000 से अधिक लोग स्वस्थ हो चुके हैं। जबकि 585 लोगों की मौत कोरोना की वजह से होने की बात कही जा रही है। इस अॉकड़े को थोड़ा ध्यान से देखने और विश्लेषण करेंगे तो कोरोना का भय बहुत हद तक कम किया जा सकता है।
मैं आधा दर्जन से अधिक लोगों को व्यक्तिगत रूप से जानता हूं जिन्होंने बिना किसी अस्पताल में जाए कोरोना को अपने घर पर ही रह कर मात दी है। बस इन्होंने डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं ली थीं। इनकी बीमारी के दौरान इनसे निरंतर बात की थी इनमें से एक को छोड़कर बाकी सभी लोगों को कोई खास परेशानी नहीं हुई थी। इसलिए कोरोना कोई दैत्य नहीं है जो एकदम से किसी एकदम स्वस्थ व्यक्ति की जान ले लेगा। यह उन्हीं लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक है जिनको पहले से कोई गंभीर बीमारियां हैं जैसे हार्ट की, डायबिटीज, किडनी या फेफड़े आदि की। कोरोना इन बीमारियों को और गंभीर बना देता है।
आंकड़े भी इसी तथ्य की पुष्टि करते हैं। जिन भी लोगों की मौत हुई है उन्हें कोई ना कोई गंभीर बीमारी कोरोना का संक्रमण होने से पहले से थी। झारखंड में कोरोना की वजह से जितने लोगों की मौत बताई गई है उनमें 20 साल तक के सिर्फ 7 लोग मरे हैं। 21 से 40 तक के 84 तथा शेष लोग 40 से अधिक उम्र के थे जिन्हें पहले से ही अन्य बीमारियां थीं।

अन्य बीमारियों से हुई मौतों को कोरोना में ना जोड़े

कुल 585 लोगों की मौत बताई गई है। इनमें से सिर्फ 177 लोगों की मौत फेफड़े की बीमारी और सांस लेने में दिक्कत की वजह से हुई है। अगर वास्तव में कोरोना की वजह से मौत कही जाए तो वो 177 लोगों की ही है। इसके अलावा 131 लोगों की मौत हार्ट अटैक से, 78 की हाइपर टेंशन से, 50 की किडनी संबंधी बीमारी से 45 की डायबिटीज से, 31 की निमोनिया तथा इसी तरह कैंसर और ब्रेन हमरेज सहित अन्य बीमारियों से बाकी लोगों की मौत हुई है। मेरा सवाल यह है कि इन बीमारियों से मौत को भी कोरोना से हुई मौत में क्यों जोड़ा जा रहा है। इन मरीजों की मौत जिन गंभीर बीमारियों की वजह से हुई है उन्हें उसी अलग कैटेगरी में दिखाया जाना चाहिए।

कोरोना कितना खतरनाक है

ऐसा नहीं है कि कोरोना को एकदम हल्के में लेकर इसे पूरी तरह अनदेखा किया जा सकता है। यह इस लिहाज से खतरनाक है कि इसका संक्रमण बहुत तेजी से होता है। यह छुआछूत की बीमारी है। इसलिए जो ऐहतियात बताए गए हैं उनका यथासंभव पालन किजिए लेकिन इतना भी मत डरिए की घर में ही कैद हो जाएं किसी से मिलना जुलना एकदम बंद कर दें।
कोरोना फेफड़े के लिए ज्यादा खतरनाक है एक रिपोर्ट आज के अखबार में पढ़ी कि 25 साल तक सिगरेट पीने से फेफड़े को जितना नुकसान होता है उतना ही नुकसान कोरोना एक महीने के संक्रमण में कर देता है। इसलिए सावधानी तो बरतें पर भयभीत ना हों कोरोना कैंसर या एडस जैसी गंभीर बीमारियों से कम खतरनाक है लेकिन यह संक्रामक अधिक है यह तथ्य समझने की जरूरत है। इसको लेकर वरीय चिकित्सकों को जागरूकता अभियान चलाना चाहिए और लोगों का भय कम करना चाहिए।

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