किसान चाची ने किसानों को दिया नवाचार और कृषि उद्यमिता का संदेश, आधुनिक तकनीक अपनाने पर दिया जोर

वैशाली: बिहार के वैशाली जिले के भगवानपुर प्रखंड स्थित प्रतापटांड गांव में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, नवाचार और कृषि आधारित स्वरोजगार के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से किसान संगोष्ठी का आयोजन किया गया। डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय, वैशाली के कृषि विभाग के सातवें सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (RAWE) कार्यक्रम के तहत कृषि रमन सलाहकार केंद्र के तत्वावधान में यह कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें पद्मश्री से सम्मानित प्रगतिशील किसान एवं उद्यमी राजकुमारी देवी, जिन्हें ‘किसान चाची’ के नाम से जाना जाता है, मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं।

Oct 24, 2026 - 18:14
किसान चाची ने किसानों को दिया नवाचार और कृषि उद्यमिता का संदेश, आधुनिक तकनीक अपनाने पर दिया जोर

वैशाली: बिहार के वैशाली जिले के भगवानपुर प्रखंड स्थित प्रतापटांड गांव में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, नवाचार और कृषि आधारित स्वरोजगार के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से किसान संगोष्ठी का आयोजन किया गया। डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय, वैशाली के कृषि विभाग के सातवें सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (RAWE) कार्यक्रम के तहत कृषि रमन सलाहकार केंद्र के तत्वावधान में यह कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें पद्मश्री से सम्मानित प्रगतिशील किसान एवं उद्यमी राजकुमारी देवी, जिन्हें ‘किसान चाची’ के नाम से जाना जाता है, मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं।

किसान चाची ने किसानों को संबोधित करते हुए आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने, खेती में नए प्रयोग करने, महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने और कृषि आधारित उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कृषि को आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनने का माध्यम बनाने की जरूरत पर जोर दिया।

कृषि, पशुपालन और स्वरोजगार की संभावनाओं पर चर्चा

संगोष्ठी में कृषि विज्ञान केंद्र, हरिहरपुर, हाजीपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अनिल कुमार सिंह, सुधा के हाजीपुर डेयरी प्लांट के इंचार्ज राहुल कुमार, खादी ग्रामोद्योग, पटना के ट्रेनिंग इंचार्ज प्रवीण कुमार, केला अनुसंधान केंद्र, गोरौल के प्रभारी एस. के. ठाकुर तथा रुडसेट संस्थान, हाजीपुर के ट्रेनिंग इंचार्ज सोनू ठाकुर ने किसानों को कृषि, पशुपालन, कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण और स्वरोजगार से जुड़ी संभावनाओं की जानकारी दी।

इस दौरान प्रगतिशील किसान एवं उद्यमी नीलम देवी ने केले के अवशेषों से सजावटी सामान और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार करने के अपने अनुभव साझा किए। वहीं, बामेती से प्रशिक्षण प्राप्त बटेर पालक राजदेव राय ने बटेर पालन से जुड़े अपने अनुभवों के माध्यम से किसानों को वैकल्पिक आजीविका के अवसरों से परिचित कराया।

कृषि शिक्षा को किसानों से जोड़ने पर जोर

विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. (डॉ.) ब्रिजेश सिंह ने कहा कि कृषि शिक्षा का उद्देश्य वैज्ञानिक ज्ञान और आधुनिक तकनीकों को किसानों तक पहुंचाना है, ताकि उनकी आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिल सके। उन्होंने RAWE जैसे कार्यक्रमों को विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण बताया, क्योंकि इनके माध्यम से छात्र ग्रामीण परिस्थितियों को समझते हैं और किसानों से सीधे जुड़कर व्यावहारिक अनुभव हासिल करते हैं।

कार्यक्रम में कृषि विभाग के विभागाध्यक्ष अंकुश कुमार सिंह तथा कृषि वैज्ञानिक प्रदीप राय, विशाल कुमार सिंह, नवेद अशरफ, नंदलाल सिंह और डॉ. पंकज मौर्य सहित विभाग के विद्यार्थी मौजूद रहे। सातवें सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं आदित्य किशोर, आदर्श, साक्षी, कनक, आकांक्षा, हर्ष, रानी और अंशु ने भी आयोजन में भाग लिया।

संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन और स्वरोजगार के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम के जरिए खेती को नवाचार, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता से जोड़ने का संदेश दिया गया।

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