बिहार की 11 सैटेलाइट टाउनशिप योजनाओं पर किसानों के सवाल, बोले- जमीन और आजीविका की कीमत पर विकास मंजूर नहीं

पटना: बिहार की प्रस्तावित 11 सैटेलाइट टाउनशिप परियोजनाओं और बिहार सिटी डेवलपमेंट एक्ट, 2026 को लेकर किसान संगठनों ने सवाल उठाए हैं। पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठनों ने कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन किसानों की जमीन, आजीविका और अधिकारों की कीमत पर विकास स्वीकार नहीं किया जाएगा।

Oct 7, 2026 - 17:00
बिहार की 11 सैटेलाइट टाउनशिप योजनाओं पर किसानों के सवाल, बोले- जमीन और आजीविका की कीमत पर विकास मंजूर नहीं

पटना: बिहार की प्रस्तावित 11 सैटेलाइट टाउनशिप परियोजनाओं और बिहार सिटी डेवलपमेंट एक्ट, 2026 को लेकर किसान संगठनों ने सवाल उठाए हैं। पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठनों ने कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन किसानों की जमीन, आजीविका और अधिकारों की कीमत पर विकास स्वीकार नहीं किया जाएगा।

किसान संगठनों के मुताबिक पटना, दरभंगा, छपरा, सोनपुर, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, गया, पूर्णिया, सीतामढ़ी, मुंगेर और सहरसा में सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना है। संगठनों ने कृषि भूमि के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल को लेकर पारदर्शिता, उचित मुआवजा, पुनर्वास और सामाजिक प्रभाव आकलन की मांग की है।

लैंड पूलिंग व्यवस्था पर भी किसानों ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि जमीन के बदले मिलने वाली विकसित भूमि का मूल्यांकन किस आधार पर किया जाएगा। साथ ही किसानों को किस स्थान और गुणवत्ता की जमीन मिलेगी और भविष्य में जमीन की कीमत बढ़ने पर उन्हें उसका कितना लाभ मिलेगा, इसे स्पष्ट करने की मांग की गई है।

किसान संगठनों ने भूमि उपयोग के प्रस्तावित अनुपात पर भी आपत्ति जताई। उनके अनुसार सड़क के लिए 22 प्रतिशत, बिक्री के लिए 15 प्रतिशत, पार्क और खेल मैदान समेत सुविधाओं के लिए 5 प्रतिशत, कमजोर वर्गों के आवास के लिए 3 प्रतिशत और भू-स्वामियों को वापस दी जाने वाली जमीन के लिए 55 प्रतिशत का प्रावधान बताया गया है।

संगठनों ने प्रत्येक परियोजना से पहले Social Impact Assessment और Social Audit कराने की मांग की। साथ ही बिहार सिटी डेवलपमेंट अथॉरिटी में किसानों, स्थानीय लोगों, निर्वाचित प्रतिनिधियों और स्वतंत्र विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग रखी।

किसान संगठनों का कहना है कि आधुनिक बिहार का विकास केवल रियल एस्टेट तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि स्मार्ट गांव, सिंचाई, कृषि, ग्रामीण उद्योग और स्थानीय रोजगार को भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए। संगठनों ने मांगें पूरी नहीं होने पर नवंबर में पटना में किसान मार्च निकालने का ऐलान किया है।

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