झारखंड बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता ने दिया इस्तीफ़ा, पार्टी पर लगाया अपमानित करने का आरोप

कुणाल का इस्तीफ़ा यह दर्शाता है की झारखंड भाजपा के अंदर सब ठीक नहीं चल रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव से ही राजनीतिक गलियारे में चर्चा होती रही है कि भाजपा के भीतर ही गुटबाज़ी हो रही है।

झारखंड बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता ने दिया इस्तीफ़ा, पार्टी पर लगाया अपमानित करने का आरोप

झारखंड भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता ने आज भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मराण्डी को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है। झारखंड भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता (अब नहीं) कुणाल सारंगी ने यह जानकारी अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स के माध्यम से दी है।

आपको बता दें की कुणाल सारंगी भाजपा में एक ख़ास पहचान बना चुके थे। झारखंड में वर्तमान सत्ता पक्ष की हर गलती पर वे लगातार आवाज़ उठाते रहते थे। उल्टे सीधे बयानों से दूर रहनेवाले कुणाल आज ख़ुद भारतीय जनता पार्टी की अंदरूनी राजनीति के शिकार बन गये हैं। यह बातें वे ख़ुद भी स्वीकार रहे हैं।

कुणाल ने इस्तीफ़ा देने की वजह बताते हुए लिखा है कि ” पिछले छह महीनों से स्थानीय संगठन (झारखंड भाजपा) के द्वारा सुनियोजित ढंग से मुझे और मेरे समर्थकों को अपमानित करने के उद्देश्य से पार्टी के कार्यक्रमों से दूर रखा जा रहा है। प्रदेश के संगठन महामंत्री और प्रभारी को कई बार सूचना देने के बावजूद भी कोई एक्शन नहीं लिया गया। इससे आहत होकर दुखी हृदय से प्रदेश प्रवक्ता के पद से इस्तीफ़ा देता हूँ।”

कुणाल सारंगी

कुणाल का इस्तीफ़ा यह दर्शाता है की झारखंड भाजपा के अंदर सब ठीक नहीं चल रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव से ही राजनीतिक गलियारे में चर्चा होती रही है कि भाजपा के भीतर ही गुटबाज़ी हो रही है। झारखंड भाजपा के शीर्षस्थ नेता अपने अलकमान के निर्णयों से भीतर ही भीतर नाराज़ चल रहे हैं। लेकिन किसकी हिम्मत है की बिग बॉस की बातों पर सवाल उठाए। सभी जानते हैं कि पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के बड़े नेता अर्जुन मुंडा कैसे चुनाव हारे थे। इस लोकसभा चुनाव को लेकर झारखंड भाजपा ऐक्टिव नहीं लग रही है। शायद ऐसा इसलिए भी कि हवा के रुख़ का अंदाज़ा लग गया हो।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जमशेदपुर के भाजपा प्रत्याशी पार्टी के इंतजाम से नाखुश है। यहां झारखंड प्रदेश के पर महामंत्री (अब राज्यसभा सांसद) प्रदीप वर्मा ने अपने एक ऐसे स्वजातीय को प्रभारी बना दिया है, जो किसी काम का नहीं। उसने अपने जैसे निष्क्रिय लोगों को जिम्मेदारी दे दी है। इससे नाराज़ होकर भाजपा के कर्मठ और सक्रिय नेता चुनाव प्रचार से ख़ुद को दूर कर लिए हैं और अपने घर बैठ गये हैं। वहीं दूसरी ओर विपक्षी पार्टी के छोटे से लेकर बड़े नाइट एकजुट होकर अपने कार्यकर्ता का मनोबल बढ़ा रहे हैं, जिसे देखकर उनके प्रत्याशी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। ऐसे में अपनी हार को सामने देख कर जमशेदपुर प्रत्याशी के हाथ-पैर फूल रहे हैं ।

बात बात पर सरकार में कमियाँ निकालने वाली भाजपा आज मुद्दाविहीन हो चुकी है। विकास का माला अलापने वाली भाजपा विकास का नाम लेने से भी कतरा रही है। पूरे झारखंड में भाजपा का चुनावी मैनेजमेंट धराशायी है। मोदी के नाम पर सीट निकलने की प्रत्याशा में न पार्टी ने ध्यान दिया न प्रत्याशियों ने। अब जब मुकाबला कड़ा दिखाई दे रहा है, तो इनकी हवाइयां उड़ रही हैं। कहा जा रहा है कि पहले चरण में 50 से ज्यादा बूथों पर भाजपा के एजेंट ही नहीं थे।

गोड्डा लोकसभा में भी यही हाल है। 2019 में जिस तरह से प्रचार प्रसार किया गया था उस तरह कुछ भी नहीं है।