खनिज संशोधन अधिनियम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी झारखंड सरकार, 14 हजार करोड़ के राजस्व नुकसान का दावा
खनिज संशोधन अधिनियम, 2026 के खिलाफ झारखंड सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है। सरकार का दावा है कि संशोधित कानून से राज्य के खनिज राजस्व पर असर पड़ेगा और करीब 14 हजार करोड़ रुपये के संभावित राजस्व नुकसान की आशंका है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मंजूरी के बाद कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
रांची:- केंद्र सरकार के खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 के खिलाफ झारखंड सरकार सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मंजूरी के बाद सरकार ने इस मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है।
राज्य सरकार का कहना है कि संशोधित कानून से खनिजों पर सेस लगाने और उससे होने वाले राजस्व पर झारखंड के अधिकार प्रभावित होंगे। सरकार के अनुमान के मुताबिक, इससे वित्तीय वर्ष 2026-27 में करीब 14 हजार करोड़ रुपये के संभावित राजस्व का नुकसान हो सकता है।
झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले को भी अपने कानूनी पक्ष का आधार बनाया है। राज्य का तर्क है कि इसी फैसले के बाद खनिजों पर सेस लगाने और उसकी वसूली की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
इसके अलावा सरकार ने केंद्र और कोयला कंपनियों से जुड़े करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये के बकाये का मुद्दा भी उठाया है। राज्य सरकार का कहना है कि नए कानून से इस दावे की कानूनी स्थिति प्रभावित हुई है और इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा जाएगा।
फिलहाल झारखंड सरकार ने संशोधित कानून के खिलाफ न्यायिक लड़ाई की तैयारी शुरू कर दी है। मामले में आगे की कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत होगी।
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