CID जांच के बीच JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते का इस्तीफा मंजूर, अक्टूबर में पूरा हो रहा था कार्यकाल
RANCHI : JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी और CID जांच के बीच झारखंड लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एल. खियांगते ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने उनका इस्तीफा बुधवार को स्वीकार कर लिया.
CID छापेमारी के बाद दिया इस्तीफा
परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं और छात्रों के भारी विरोध के बाद मंगलवार को सीआईडी और रांची पुलिस की संयुक्त टीम ने जेपीएससी कार्यालय में छापेमारी की थी. जांच और अधिकारियों से हुई गहन पूछताछ के कुछ ही घंटों बाद मंगलवार की देर रात ही अध्यक्ष एल. खियांगते ने अपने पद से त्याग-पत्र दे दिया था.
पूर्व मुख्य सचिव रह चुके हैं एल. खियांगते
वर्ष 1988 बैच के वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी रहे एल. खियांगते जेपीएससी अध्यक्ष बनने से पहले झारखंड के मुख्य सचिव का अहम पद संभाल चुके थे. अपनी सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने 27 फरवरी 2025 को जेपीएससी के अध्यक्ष पद का प्रभार ग्रहण किया था. उनका कार्यकाल 25 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित था लेकिन परीक्षा विवाद और प्रशासनिक दबाव के बीच उन्हें कार्यकाल पूरा होने से पहले ही पद छोड़ना पड़ा.
लगातार मिल रही थी गड़बड़ी की शिकायत
सीआईडी ने जेपीएससी के उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, अन्य स्टाफ और आउटसोर्सिंग एजेंसी टीडीपीएल के ठिकाने भी शामिल हैं. टीडीपीएल का पूरा नाम टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड है और यह जेपीएससी से जुड़े परीक्षा कार्यों में शामिल रहती है. इस एजेंसी को जेएसएससी ने ब्लैकलिस्टेड कर दिया था.
इस एजेंसी के डायरेक्टर सतपाल सिंह और रणवीर सिंह बताये जा रहे हैं. मुख्यमंत्री हेमंत संरिन के पास जेपीएससी गड़बड़ी को लेकर लगातार शिकायतें पहुंच रही थीं. फिलहाल टीम जेपीएससी की उप-परीक्षा नियंत्रक और टीडीपीएल के स्टाफ सहित आठ को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है.
20 मई 2025 को परीक्षाओं में अनियमितता को लेकर जेएसएससी ने टीडीपीएल कंपनी को काली सूची में डाल दिया था. लेकिन उसके बाद भी यह एजेंसी जेपीएससी में न केवल परीक्षाओं का संचालन कर रही थी, बल्कि सभी आठ तरह के संवेदनशील काम यही कर रही थी वहीं इससे पहले परीक्षा में अलग-अलग एजेंसियों से अलग-अलग काम लिये जाते थे.
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