नालंदा विश्वविद्यालय में ‘विकसित भारत’ पर राष्ट्रीय परिसंवाद शुरू, राज्यपाल ने भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका पर दिया जोर

नालंदा: नालंदा विश्वविद्यालय में सोमवार को ‘विकसित भारत के निर्माण में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय परिसंवाद का शुभारंभ हुआ। विश्वविद्यालय के विश्वमित्रालय सभागृह में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैय्यद अता हसनैन ने किया।

Sep 21, 2026 - 15:31
नालंदा विश्वविद्यालय में ‘विकसित भारत’ पर राष्ट्रीय परिसंवाद शुरू, राज्यपाल ने भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका पर दिया जोर

नालंदा: नालंदा विश्वविद्यालय में सोमवार को ‘विकसित भारत के निर्माण में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय परिसंवाद का शुभारंभ हुआ। विश्वविद्यालय के विश्वमित्रालय सभागृह में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैय्यद अता हसनैन ने किया।

नालंदा विश्वविद्यालय और नई दिल्ली स्थित शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संयुक्त तत्वावधान में यह परिसंवाद 21 और 22 सितंबर को आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से शिक्षाविद, शोधकर्ता, कुलपति और विभिन्न शिक्षण एवं तकनीकी संस्थानों के निदेशक हिस्सा ले रहे हैं।

भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा पर चर्चा

दो दिवसीय परिसंवाद में भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा और शोध से जोड़ने के साथ-साथ विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में विश्वविद्यालयों की भूमिका पर चर्चा की जा रही है। सम्मेलन के दौरान भारतीय ज्ञान प्रणाली को शिक्षा के विभिन्न स्तरों पर प्रभावी ढंग से लागू करने के तरीकों पर विशेषज्ञ अपने विचार रख रहे हैं।

नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने बताया कि सम्मेलन में 15 से अधिक कुलपति और 12 से अधिक तकनीकी संस्थानों के निदेशक शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि दो दिनों तक भारतीय ज्ञान प्रणाली, शिक्षकों के प्रशिक्षण, विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम और नई शिक्षा नीति को स्थानीय स्तर पर लागू करने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होगा।

राज्यपाल ने बताया भारतीय ज्ञान को महत्वपूर्ण शक्ति

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल सैय्यद अता हसनैन ने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा देश की महत्वपूर्ण शक्तियों में से एक रही है। उन्होंने कहा कि इस ज्ञान परंपरा का आधुनिक समय में उपयोग कर देश के विकास में योगदान दिया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लक्ष्य को हासिल करने के लिए शिक्षा, शोध और भारतीय ज्ञान परंपरा के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। इसी उद्देश्य से आयोजित यह राष्ट्रीय परिसंवाद महत्वपूर्ण मंच प्रदान कर रहा है।

विकसित भारत-2047 के लक्ष्य पर मंथन

परिसंवाद में विशेषज्ञ इस बात पर भी चर्चा कर रहे हैं कि भारतीय ज्ञान प्रणाली को वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और शोध के साथ किस तरह जोड़ा जाए। साथ ही विद्यार्थियों और शिक्षकों को नई शिक्षा नीति के अनुरूप तैयार करने तथा स्थानीय जरूरतों के अनुसार शिक्षा को प्रभावी बनाने पर भी विचार किया जा रहा है।

दो दिनों तक चलने वाले इस राष्ट्रीय परिसंवाद में विभिन्न सत्रों के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा, शिक्षा, शोध और विकसित भारत के लक्ष्य से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों के विचार सामने आएंगे।

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