किशनगंज रेलवे स्टेशन के माल गोदाम से फैल रही धूल और प्रदूषण पर उठे सवाल, रेल विभाग की चुप्पी से लोगों में नाराजगी
किशनगंज: नॉर्थ ईस्ट का मुख्य द्वार कहे जाने वाले बिहार के किशनगंज रेलवे स्टेशन के माल गोदाम में सीमेंट और खाद की ढुलाई को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि माल गोदाम में लगातार सीमेंट और खाद की रैक आने तथा माल उतारने के दौरान उड़ने वाली धूल से रेल यात्रियों और आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने इस मामले में रेलवे प्रशासन से आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
किशनगंज: नॉर्थ ईस्ट का मुख्य द्वार कहे जाने वाले बिहार के किशनगंज रेलवे स्टेशन के माल गोदाम में सीमेंट और खाद की ढुलाई को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि माल गोदाम में लगातार सीमेंट और खाद की रैक आने तथा माल उतारने के दौरान उड़ने वाली धूल से रेल यात्रियों और आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने इस मामले में रेलवे प्रशासन से आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
प्लेटफॉर्म तक पहुंच रही सीमेंट और खाद की धूल
किशनगंज रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या एक और दो के समीप स्थित माल गोदाम में लगातार सीमेंट और खाद की रैक पहुंचती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, मालगाड़ियों से सामान उतारने और लोडिंग-अनलोडिंग के दौरान धूल उड़ती है। इससे प्लेटफॉर्म पर ट्रेन का इंतजार कर रहे यात्रियों के साथ-साथ आसपास रहने वाले लोगों को भी परेशानी होती है।
लोगों का कहना है कि कई बार मालगाड़ियों से माल उतारने की प्रक्रिया लंबे समय तक चलती रहती है। ऐसे में सीमेंट की धूल और अन्य कण हवा में फैलकर यात्रियों तथा स्थानीय निवासियों के संपर्क में आ सकते हैं। लोगों ने आशंका जताई है कि लंबे समय तक इस तरह के प्रदूषण के संपर्क में रहने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बीच रेलवे अधिकारियों ने नहीं दिया जवाब
इस मामले को लेकर मीडिया कर्मियों ने स्टेशन मास्टर, सहायक मंडल अभियंता और स्वास्थ्य निरीक्षक से सवाल किए। हालांकि, संबंधित अधिकारियों ने कैमरे पर इस विषय में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। अधिकारियों की ओर से जवाब नहीं मिलने के बाद माल गोदाम में धूल नियंत्रण और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों की मांग है कि माल गोदाम में धूल को नियंत्रित करने के लिए उचित व्यवस्था की जाए। साथ ही, यह भी जांच की जाए कि सीमेंट और खाद की ढुलाई के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है या नहीं।
विधायक तौसीफ आलम ने रेलवे व्यवस्था पर उठाए सवाल
बहादुरगंज के विधायक तौसीफ आलम ने इस मुद्दे पर रेलवे प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि किशनगंज और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए दिल्ली, पंजाब, गुजरात समेत देश के विभिन्न राज्यों में आते-जाते हैं। किशनगंज रेल मार्ग पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों को जोड़ने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
विधायक के अनुसार, इस मार्ग से बड़ी संख्या में यात्रियों का आवागमन होता है। ऐसे में स्टेशन परिसर और माल गोदाम के आसपास स्वच्छता तथा स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करना रेलवे की जिम्मेदारी है। उन्होंने सवाल उठाया कि यात्रियों और स्थानीय लोगों की सेहत से जुड़े इस मुद्दे पर रेलवे प्रशासन गंभीरता क्यों नहीं दिखा रहा है।
उन्होंने रेल मंत्री और संबंधित अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की।
स्थानीय निवासी ने भी जताई चिंता
स्थानीय ग्रामीण फिरोज आलम ने भी माल गोदाम से उड़ने वाली धूल को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि आसपास रहने वाले लोगों को इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ता है। स्थानीय निवासियों की मांग है कि रेलवे प्रशासन मौके की जांच कराए और धूल से बचाव के लिए प्रभावी इंतजाम करे।
जांच और कार्रवाई की मांग
किशनगंज रेलवे स्टेशन के माल गोदाम में सीमेंट और खाद की ढुलाई से जुड़े इस मामले में अब रेलवे प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि प्रदूषण के स्तर की जांच कराई जाए, माल की ढुलाई के दौरान धूल को नियंत्रित करने के उपाय अपनाए जाएं और यात्रियों तथा आसपास के निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
फिलहाल, माल गोदाम से निकलने वाली धूल और स्थानीय लोगों की स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बीच यह स्पष्ट होना बाकी है कि वहां प्रदूषण का स्तर कितना है और क्या निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है।
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