बिहार में भूदान भूमि के रिकॉर्ड होंगे डिजिटल, मंत्री दिलीप जायसवाल ने मिशन मोड में काम करने का दिया निर्देश

पटना: बिहार में भूदान भूमि से जुड़े अभिलेखों को व्यवस्थित करने और उनके बेहतर प्रबंधन के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। इस संबंध में मंगलवार को विभागीय मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में भूदान भूमि के रिकॉर्ड के सत्यापन, अद्यतीकरण, स्कैनिंग और डिजिटलीकरण को लेकर कई अहम निर्देश दिए गए।

Sep 30, 2026 - 13:14
बिहार में भूदान भूमि के रिकॉर्ड होंगे डिजिटल, मंत्री दिलीप जायसवाल ने मिशन मोड में काम करने का दिया निर्देश

पटना:- बिहार में भूदान भूमि से जुड़े अभिलेखों को व्यवस्थित करने और उनके बेहतर प्रबंधन के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। इस संबंध में मंगलवार को विभागीय मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में भूदान भूमि के रिकॉर्ड के सत्यापन, अद्यतीकरण, स्कैनिंग और डिजिटलीकरण को लेकर कई अहम निर्देश दिए गए।

मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने अधिकारियों को भूदान भूमि से संबंधित सभी उपलब्ध अभिलेखों की इन्वेंट्री तैयार करने और उन्हें मिशन मोड में व्यवस्थित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि उपलब्ध भू-अभिलेखों का आवश्यकतानुसार सत्यापन कर उन्हें सुरक्षित रखा जाए, ताकि भविष्य में रिकॉर्ड की जांच और उनके इस्तेमाल में किसी तरह की परेशानी न हो।

बैठक में विभाग के सचिव जय सिंह ने निर्देश दिया कि सभी जिलों में अपर समाहर्ता की अध्यक्षता में विशेष टीम गठित की जाए। यह टीम भूदान भूमि से संबंधित उपलब्ध अभिलेखों की विस्तृत इन्वेंट्री तैयार करेगी। साथ ही रिकॉर्ड की स्कैनिंग और डिजिटलीकरण का काम भी किया जाएगा।

इसके अलावा भूदान भूमि की अलग से मैपिंग तैयार करने पर भी जोर दिया गया, ताकि भूमि से जुड़े रिकॉर्ड का प्रबंधन बेहतर तरीके से किया जा सके। अभिलेखों के संरक्षण और उनके अद्यतीकरण को लेकर भी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

इस समीक्षा बैठक में सचिव सीमा त्रिपाठी, राजस्व पर्षद के अपर सदस्य संजीव हंस, उप निदेशक मोना झा, उप सचिव अविनाश कुमार, सहायक निदेशक सह जनसंपर्क पदाधिकारी जूही कुमारी और आईटी मैनेजर आनंद शंकर समेत विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

सरकार की इस पहल के तहत भूदान भूमि के पुराने रिकॉर्ड को व्यवस्थित और डिजिटल रूप में सुरक्षित करने की तैयारी है। इससे भविष्य में भूदान भूमि से संबंधित अभिलेखों के सत्यापन और प्रबंधन में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

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