UPSC के 100 साल पूरे, लोक सेवा भर्ती व्यवस्था में बड़े बदलावों का सफर
नई दिल्ली: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) 1 अक्टूबर 2026 को अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर रहा है। भारत में पहली Public Service Commission की स्थापना 1 अक्टूबर 1926 को हुई थी। समय के साथ यह संस्था एक सलाहकारी निकाय से विकसित होकर एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था बनी।
नई दिल्ली: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) 1 अक्टूबर 2026 को अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर रहा है। भारत में पहली Public Service Commission की स्थापना 1 अक्टूबर 1926 को हुई थी। समय के साथ यह संस्था एक सलाहकारी निकाय से विकसित होकर एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था बनी।
UPSC के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 1950-51 में आयोग की परीक्षाओं के लिए 42,727 आवेदन प्राप्त हुए थे। इसके बाद अभ्यर्थियों की संख्या लगातार बढ़ी और 2022-23 में यह आंकड़ा 45.10 लाख के उच्चतम स्तर तक पहुंचा।
महिला अभ्यर्थियों की भागीदारी में भी बढ़ोतरी हुई है। Civil Services Examination (CSE) 2025 में कुल अनुशंसाओं में महिलाओं की हिस्सेदारी 31.2 प्रतिशत रही, जबकि 1952 में यह आंकड़ा 3.6 प्रतिशत था।
UPSC की परीक्षा प्रक्रिया में भाषाई समावेशन पर भी जोर दिया गया है। अब उम्मीदवार Personality Test में भारतीय भाषा में शामिल हो सकते हैं। इसके लिए UPSC की ओर से इंटरप्रेटर की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
एक सदी की यात्रा में UPSC के माध्यम से भारत की सार्वजनिक सेवाओं में भर्ती व्यवस्था का विस्तार हुआ है। आवेदन संख्या में वृद्धि के साथ उम्मीदवारों की भागीदारी और प्रतिनिधित्व में भी बदलाव आया है।
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