लोन रिकवरी के नाम पर मनमानी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, फाइनेंस कंपनी को ₹10 लाख मुआवजा देने का आदेश

नई दिल्ली: लोन की किश्तें बकाया होने पर बैंक या वित्तीय संस्था को रकम की वसूली का अधिकार है, लेकिन रिकवरी की प्रक्रिया कानून के दायरे में रहकर ही की जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में वाहन की कथित जबरन जब्ती और उसके बाद की कार्रवाई पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए वित्तीय संस्था को ₹10 लाख मुआवजा देने का निर्देश दिया।

Sep 27, 2026 - 20:34
लोन रिकवरी के नाम पर मनमानी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, फाइनेंस कंपनी को ₹10 लाख मुआवजा देने का आदेश

नई दिल्ली:- लोन की किश्तें बकाया होने पर बैंक या वित्तीय संस्था को रकम की वसूली का अधिकार है, लेकिन रिकवरी की प्रक्रिया कानून के दायरे में रहकर ही की जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में वाहन की कथित जबरन जब्ती और उसके बाद की कार्रवाई पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए वित्तीय संस्था को ₹10 लाख मुआवजा देने का निर्देश दिया।

मामला Hari Dutta Sharma बनाम State of U.P. & Ors. से जुड़ा है। मामले में वाहन मालिक ने अपनी आजीविका के लिए Tata SFC 407 ट्रक खरीदा था और इसके लिए चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी से लोन लिया था।

मामले के अनुसार, लोन की किश्तें बकाया होने के बाद 9 अप्रैल 2023 की रात करीब 1 बजे रिकवरी एजेंट वाहन लेने पहुंचे। आरोप था कि उचित पूर्व सूचना के बिना वाहन के स्टीयरिंग का लॉक तोड़कर उसे जबरन ले जाया गया। बाद में वाहन की नीलामी भी कर दी गई।

पीड़ित ने न्यायिक राहत के लिए हाई कोर्ट का रुख किया, लेकिन राहत नहीं मिलने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अदालत ने स्पष्ट किया कि लोन की वसूली का अधिकार होने का मतलब यह नहीं है कि बैंक या वित्तीय संस्था कानून को अपने हाथ में ले सकती है। रिकवरी की प्रक्रिया संबंधित कानून, ऋण समझौते की शर्तों और लागू नियामकीय नियमों के अनुरूप होनी चाहिए।

मामले की परिस्थितियों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने वित्तीय संस्था को पीड़ित को ₹10 लाख का मुआवजा देने का निर्देश दिया। इसके अलावा वाहन की बिक्री से प्राप्त ₹4.50 लाख की राशि 6 प्रतिशत ब्याज सहित वापस करने और संबंधित दोनों ऋण खातों को बंद करने का भी निर्देश दिया गया।

फैसले से यह स्पष्ट होता है कि लोन डिफॉल्ट की स्थिति में वित्तीय संस्था कानूनी तरीके से वसूली कर सकती है, लेकिन धमकी, बल प्रयोग या मनमाने तरीके से वाहन पर कब्जा करने जैसी कार्रवाई स्वीकार्य नहीं है।

लोन लेने वाले लोगों को अपने ऋण समझौते, नोटिस और रिकवरी से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए। किसी विवाद की स्थिति में संबंधित कानूनी और नियामकीय प्रक्रिया के तहत शिकायत की जा सकती है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0