ग्रामीण विकास विभाग द्वारा मनरेगा एवं JSWM कर्मियों के लिए दो-दिवसीय राज्य स्तरीय एआई (AI) आधारित क्षमता निर्माण प्रशिक्षण का शुभारंभ
विभागीय सुदृढ़ीकरण एवं तकनीकी अपग्रेडेशन की दिशा में एक और अनूठा कदम, सर्ड (SIRD) रांची में देश के ख्यातिप्राप्त विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी सत्रों का संचालन
झारखण्ड सरकार के ग्रामीण विकास विभाग द्वारा राज्य ग्रामीण विकास संस्थान (SIRD), रांची में दो-दिवसीय राज्य स्तरीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक शुभारंभ किया गया। 11 और 12 जून 2026 तक चलने वाले इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्य स्तर पर कार्यरत मनरेगा और झारखंड स्टेट वॉटरशेड मिशन (JSWM) के पदाधिकारी व कर्मी भाग ले रहे हैं।
सरकारी कार्यप्रणाली को आधुनिक और अप-टू-डेट रखने की निरंतर प्रक्रिया के तहत आयोजित इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य आधुनिक सूचना तकनीकों के माध्यम से जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मियों की कार्यकुशलता को और अधिक सुदृढ़ करना तथा डेटा विश्लेषण, योजना निर्माण व निर्णय लेने की क्षमता को सशक्त बनाना है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में अपर मनरेगा आयुक्त, ग्रामीण विकास विभाग एवं विशेष कार्य पदाधिकारी, मनरेगा, ग्रामीण विकास विभाग भी मौजूद रहे l
AI + Human Intelligence + Experiential Intelligence मॉडल पर जोर
प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रथम दिवस की शुरुआत ग्रामीण विकास विभाग के एआई सपोर्ट सेल (AI Support Cell) के कोऑर्डिनेटर विनोद कुमार पांडे द्वारा की गई। अपने उद्घाटन सत्र में उन्होंने प्रतिभागियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मूलभूत अवधारणाओं से परिचित कराते हुए “AI + Human Intelligence + Experiential Intelligence” मॉडल प्रस्तुत किया। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि प्रभावी एवं जिम्मेदार निर्णय लेने के लिए केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मानव अनुभव, क्षेत्रीय समझ एवं व्यावहारिक ज्ञान के साथ एआई का संयोजन ही सबसे बेहतर और जनोपयोगी परिणाम सुनिश्चित कर सकता है।
पुणे और बेंगलुरु के विशेषज्ञों ने सिखाए एआई के व्यावहारिक गुर
इस उच्च-स्तरीय सत्र में प्रतिभागियों को व्यावहारिक कौशल प्रदान करने के लिए देश के ख्यातिप्राप्त एआई (AI) एवं डेटा एनालिटिक्स विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है। पुणे से आईं एआई विशेषज्ञ नीलम पाठक तथा बेंगलुरु से आए सौरव दत्ता एवं नैंसी गोयल द्वारा विभिन्न तकनीकी सत्र संचालित किए गए। इन सत्रों में प्रतिभागियों को शासन एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एआई की असीम संभावनाओं, डेटा एनालिटिक्स तथा इसके व्यावहारिक उपयोग से अवगत कराया गया।
स्थापित प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और बेहतर सेवा वितरण
इस तकनीकी पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी तंत्र की कार्यकुशलता को गति देना, डेटा-आधारित पारदर्शी निर्णयों को बढ़ावा देना और ग्रामीण विकास योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन को परिणामोन्मुख बनाना है। ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार, प्रशासनिक कार्यों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के समावेश से योजनाओं की मॉनिटरिंग और जन-सेवा वितरण की गुणवत्ता में निरंतर सुधार होगा। यह कार्यक्रम तकनीकी नवाचारों के जरिए झारखण्ड के ग्रामीण विकास प्रशासन को अधिक पारदर्शी, गतिशील और उत्तरदायी बनाने का एक प्रगतिशील प्रयास है।
विभागीय विजन की निरंतरता और आधुनिक सुशासन का संकल्प
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम माननीय ग्रामीण विकास मंत्री, श्रीमती दीपिका पांडेय सिंह के उस विजन का हिस्सा है, जिसके तहत अत्याधुनिक तकनीकों से सरकारी कार्यप्रणाली को सुदृढ़ किया जा रहा है। विभाग के 'एआई सपोर्ट सेल' द्वारा आयोजित यह सत्र झारखण्ड के ग्रामीण प्रशासन में एआई के उपयोग को संस्थागत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल न केवल कर्मियों की निर्णय क्षमता को आधुनिक बनाएगी, बल्कि 'डेटा-ड्रिवन गवर्नेंस' की नींव मजबूत कर ग्रामीण विकास की गति को लगातार आगे बढ़ाएगी।
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