फरक्का समझौते पर JDU का बड़ा दावा, संजय झा बोले- बिहार के हित में नहीं है मौजूदा व्यवस्था; केंद्र से पुनर्विचार की मांग
पटना: फरक्का समझौते और बिहार के जल अधिकार को लेकर JDU के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बिहार के जल अधिकार से जुड़े इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार का ध्यान लगातार आकर्षित किया जा रहा है। संजय झा के मुताबिक, मौजूदा फरक्का समझौता बिहार के हित में नहीं है और इस पर पुनर्विचार की जरूरत है।
पटना:- फरक्का समझौते और बिहार के जल अधिकार को लेकर JDU के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बिहार के जल अधिकार से जुड़े इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार का ध्यान लगातार आकर्षित किया जा रहा है। संजय झा के मुताबिक, मौजूदा फरक्का समझौता बिहार के हित में नहीं है और इस पर पुनर्विचार की जरूरत है।
संजय झा ने बताया कि ‘नीतीश संवाद’ के पहले चरण में चार जिलों का दौरा पूरा हो चुका है और कुल 12 जिलों में संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं। उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य लोगों को बिहार के जल अधिकार के प्रति जागरूक करना और राज्य के हित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाना है।
संजय झा ने दावा किया कि पिछले करीब 30 वर्षों से बिहार के हिस्से का पानी राज्य से बाहर जा रहा है। उनके अनुसार, 1996 में हुए फरक्का समझौते के तहत बांग्लादेश को पानी दिया जाता है और उनका आरोप है कि बिहार के हिस्से का करीब 1100 क्यूसेक पानी भी बाहर चला जाता है।
उन्होंने कहा कि उन्होंने जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी के साथ मिलकर केंद्र सरकार के सामने यह मुद्दा उठाया है। विदेश मंत्री को भी इस संबंध में जानकारी दी गई है। संजय झा ने कहा कि केंद्र की ओर से इस मामले में सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिया गया है।
बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ का जिक्र करते हुए संजय झा ने गंगा में जमा होने वाली भारी गाद को भी बड़ी समस्या बताया। उन्होंने कहा कि एक तरफ बिहार बाढ़ से प्रभावित होता है, जबकि दूसरी ओर जनवरी से मई के बीच, जब राज्य को सिंचाई और पेयजल के लिए पानी की जरूरत होती है, उस दौरान पानी बाहर चला जाता है।
संजय झा का कहना है कि अगर बिहार को गंगा के पानी का बेहतर इस्तेमाल करने का अधिकार और व्यवस्था मिले, तो राज्य में सिंचाई और पेयजल की समस्या काफी हद तक कम की जा सकती है।
उन्होंने समझौते की अवधि समाप्त होने का हवाला देते हुए कहा कि इसका नवीनीकरण नहीं होना बेहतर होगा। अगर नवीनीकरण किया जाता है, तो यह बिहार के हितों को ध्यान में रखकर होना चाहिए।
फरक्का समझौते को लेकर JDU के इस रुख से बिहार के जल अधिकार का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और नीतिगत चर्चा के केंद्र में आ गया है।
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